
बच्चों में मलावरोध कष्टकारी समस्या
मलावरोध, कब्जियत, विबन्ध आदि पर्यायवाची हैं। मलावरोध नवजात शिशु में होने वाला सामान्य रोग है, सामान्यत: मलावरोध बच्चों का भोजन, उनकी सक्रियता, क्रियाशीलता और अन्य आदतों पर निर्भर करता है। सभी बच्चों में मलत्याग करने की अपनी-अपनी आदतें होती हैं, कुछ बच्चे दिन में 3-4 बार मलत्याग करते हैं तो कुछ बच्चे 3-4 दिन में एकबार मल त्याग करते हैं। परन्तु यदि बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास आदि पर मलावरोध असर पड़ता है तो बच्चे को डॉक्टर के पास ले जाना अत्यंत आवश्यक होता है।
कारण
बच्चों
को
चर्बीयुक्त भोजन ज्यादा
देने
से
पोषणहीन आहार
देने
से,
आहार में
तरल
पदार्थों की
कमी,
मात्रा
में
आहार अल्प
देने
से,
कृत्रिम दुग्धपान (बोतल,
कटोरी,
चम्मच
से)
भय तनाव
आदि
कारणों से
मलावरोध
उत्पन्न
होता
है।
लक्षण
उदरशूल,
बच्चों
का
रोना व
कष्ट
से
मल का
आना,
पेट
का फूलना,
आदि
लक्षण मलावरोध
में
मिलते हैं,
भूख
का न
लगना।
चिकित्सा
बच्चों
की
इस व्याधि
में
कारण को
हटाना
ही
विशिष्ट चिकित्सा
होती
है।
बच्चों में
जहाँ
तक
सम्भव हो
औषधियाँ
नहीं
देनी
चाहिए।
- हरी पत्तेदार सब्जियाँ तरल पदार्थ आदि का सेवन करायें।
- अंजीर, मुनक्का, दूध में मिलाकर देना अत्यंत लाभदायक है।
- पपीता, सन्तरा, आम, अनार, चीकू, आदि फलों के रसों का सेवल करायें।
- बच्चों को निश्चित समय पर मल प्रवृत्ति की आदत डालें।
- बच्चों को व्यायाम, खेलना दौडऩा आदि की आदत डालें।
उपरोक्त
उपायों
के
उपरान्त भी
लाभ
न मिलने
पर
किसी योग्य
आयुर्वेदिक
चिकित्सक
से
सम्पर्क करें।
डा.
अमोल गर्ग
बी.ए.एम.एस.,
पी.जी.पी.पी
आयुर्वेदिक
चिकित्सक
E-mail : drgarg4u@rediffmail.com
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