ब्लैकमेलिंग और घोटालों का नेट्रिप

केंद्र सरकार के भारी उद्योग मंत्रालय के घपले भी काफी भारी हैं। अपनी एक चहेती कंपनी को ठेका देने के लिए इसी मंत्रालय के एक महकमे ने नियम-कानूनों को ऐसा ठेंगा दिखाया कि पूछिए मत। न केवल इसके एक बड़े अफसर को एक महिला सहकर्मी के साथ ट्रेप किया गया बल्कि इसी बिता पर उसे ब्लैकमेल करके मनमाना काम कराया गया। डायलॉग टीम की रिपोर्ट

केंद्र सरकार के भारी उद्योग मंत्रालय के घपले भी काफी भारी है। अपनी मनपसंद कंपनी को ठेका देने के लिए मंत्रालय के एक विभाग ने भ्रष्टाचार की सारी हदों को पार कर दिया। न केवल टेंडर देने में अनियमितता बरती गई बल्कि भ्रष्टïाचार में सहयोग न देने वाले लोगों को भी ठिकाने लगा दिया गया। आपको शायद ये जानकर हैरत हो लेकिन ये सच है कि अपने फायदे के लिए एक कर्मचारी को ब्लैकमेल किया गया और उस पर दबाव डालने के लिए यौन शोषण का झूठा आरोप लगाया गया। भारी उद्योगमंत्री विलासराव देशमुख को इस पूरे खेल में पीडि़त व्यक्ति द्वारा लिखे पत्र में सीधेतौर पर कहा कि मेरे सीईओ ने मुझे ब्लैकमेल किया। अधिकारी का कहना है कि जब मैंने अपने शीर्ष पदों पर बैठे लोगों के आदेश को मानने से इंकार किया तो मुझे नौकरी से निकाल दिया गया।

कार्यस्थल पर शोषण, ब्लैकमेल, 1800 करोड़ रुपए का घोटाला और एक अधिकारी को नौकरी से निकालना। एक फिल्मी कहानी की तरह लगने वाली ये सारी बातें। अब ऐसे में कौन कह सकता है कि सरकारी विभागों में बोरियत होती है। अगर अमेरिकी कंपनी द्वारा न्यायलय में प्रस्तुत किए गए डाक्यूमेंट्स और पीडि़त व्यक्ति द्वारा लिखे गए पत्र पर विश्वास किया जाए तो भारी उद्योग और पब्लिक इंटरप्राइजेज मंत्रालय के अंर्तगत आने वाला नेशनल आटोमेटिव टेस्टिंग एंड रिसर्च एंड डेवलपमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट (नेट्रिप) के डाइरेक्टर टेक्निकल डा.जी.के.शर्मा को निलंबित कर दिया गया, उन पर यौन शोषण करने के आरोप लगाए गए और ठेका प्रक्रिया में एक विशेष कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए ब्लैकमेल किया गया। कंपनी के टेक्निकल डाइरेक्टर जी.के.शर्मा को 11 जून को निलंबित कर दिया।

दरअसल, देश में स्वचलित वाहनों की मांग और आर्पूित को बढता देख भारी उद्योग मंत्रालय ने २००५ में स्वायत्तशासी संस्था नेट्र्रिप खोली। देश भर में सात जगहों पर इसकी प्रयोगशालाएं, टेस्टिंग केंद्र खोले गए। नेट्रिप ने एक प्रोजेक्ट के लिए टेंडर आमंत्रित किया था। इस प्रोजेक्ट का मकसद टेस्ट सेंटर स्थापित करना और पहले से मौजूद टेस्ट सेंटरों को अपग्रेड करना है। इस प्रोजेक्ट के लिए कुल 1800 करोड़ रुपए प्रस्तावित किए गए थे। नेट्रिप के पश्चिम में पुणे, अहमदनगर में केंद्र है। दक्षिण में चेन्नई, तमिलनाडु में इसके केंद्र है तो उत्तर भारत में मानेसर में इसका केंद्र है। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और सिलचर में भी इसके केंद्र है।

जिसने नहीं किया सहयोग उसकी खैर नहीं
अपनी मनपसंद कंपनी को ठेका देेने के लिए अधिकारी इस कदर लालयित थी कि नियम-कानूनों को ताक पर रखने के साथ-साथ राह में आने वाले किसी भी रोड़े को हटाने के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार थे। सहयोग न करने वाले को नौकरी से निकाल देने तक की धमकी दी गई और एक शख्स को तो भ्रष्टïाचार का विरोध करने के परिणामस्वरूप मिनटों में नौकरी से निकाल दिया है। विलासराव देशमुख को लिखे पत्र में उन्होंने नेट्रिप कंपनी के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर पर आरोप लगाया कि उन्होंने मुझ पर यौन शोषण का झूठा आरोप लगाकर एवीएल कंपनी को ठेका दिलाने के लिए दबाव डाला। संतोष मोहन देव जब भारी उद्योग मंत्री थे तब एवीएल को 2008 में 39 करोड़ और 56 करोड़ रुपए के दो ठेके प्रदान किए गए। मुझ पर महिलासहकर्मी से दुव्र्यवहार करने का आरोप लगाया गया। अक्तूबर 2007 में राजेश सिंह ने मुझ पर यौन शोषण का आरोप लगाया। उस दौरान मुझे न तो कोई शिकायत दिखाई गई न ही चार्जशीट। जब मैंने राजेश सिंह के इस दुव्र्यवहार की शिकायत की तो इसे अनुसना कर दिया गया। २००९ जी.के.शर्मा पर भ्रष्टïाचार में सहयोग न करने के कारण नौकरी से निकाल दिया गया। मुझ पर महिला सहकर्मी से दुव्र्यवहार का आरोप लगाया गया। जी.के.शर्मा को नौकरी से निकाला जाना अन्य लोगों के लिए हिदायत थी कि सहयोग करो वरना नौकरी छोड़ दो। हद तो तब हो गई जब नेट्र्रिप के तकनीक निदेशक डा. जी.के.शर्मा पर महिला सहयोगी के शोषण का आरोप लगाया गया और उन्हें एक केंद्र्र के पद से हटा दिया गया। लेकिन नेट्रिप ने उन्हें इस बात की इजाजत दे दी कि वह अपने पद पर काम करते रहे। उनसे माफीनामा का पत्र ले लिया गया। यह इस बात के प्रति आश्वस्त कर रहा था कि प्रोजेक्ट एवीएल को मिले। जी.के.शर्मा का कहना है कि इन प्रोजेक्ट में जमकर धांधली हुई हे। उन्होंने बताया कि मैंने दो साल तक नेशनल आटोमेटिव टेस्टिंग एंड आरएंड डी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में बतौर डाइरेक्टर टेक्निकल के पद पर रहा। मुझे ११ जून को अचानक हटा दिया गया। साथ ही मुझे इस बात का आदेश दे दिया गया कि मैं चाहरदीवारी में न प्रवेश न करूं। इन सबके पीछे वजह थी कि मैंने भ्रष्टïाचार में सहयोग नहीं दिया। ११ जून को बेहद संवेदनशील माहौल में धमकी भरे अंदाज में मुझे निलंंबित करने का पत्र सौंपा गया। अमेरिका की बुर्क ई पोर्टर मशीनरी कंपनी यौन शोषण के आरोप वाले झूठे पत्र को भी न्यायलय के समझ प्रस्तुत किया है। गौरतलब है कि बुर्क ई पोर्टर मशीनरी कंपनी भी ठेका प्रक्रिया में हिस्सा थी। बुर्क ई पोर्टर मशीनरी कंपनी का आरोप है कि शर्मा को ब्लैकमेल किया गया और ठेका एवीएल को प्रदान किया गया। शर्मा को ब्लैकमेल करने के पीछे कारण था कि उन्हें बिडर का तकनीक आकलन करना था। अमेरिकी कंपनी का आरोप है कि शर्मा को कंपनी के सीईओ ने 2009 में निलंबित किया। डायलॉग इंडिया से बातचीत में शर्मा ने कहा कि जो कुछ भी आपने सुना और देखा है वह सच है। मैंने अमेरिका की एक फर्म के साथ मिलकर एक कंसलटेंसी शुरू कर दी है और अब मैं भूतकाल को दोहराना नहीं चाहता हूं।

भ्रष्टाचार का घिनौना रंग
मामला दरअसल ये है कि अपनी चहेती कंपनी को ठेका देनेे के लिए इस मंत्रालय के इस महकमे ने नियम कानूनों की धज्जियां उड़ा कर दी। कंपनी को लाभ दिलाने के लिए सारे जुगत भिड़ाए गए। यहां तक कि जिस भी शख्स ने इस भ्रष्टïाचार में सहयोग देने से इंकार किया उससे या तो इस्तीफा ले लिया गया या किनारे कर दिया गया। कंपनी को फायदा दिलाने के चक्कर में करीब चार करोड रूपए का अग्रिम भुगतान कर दिया। एनएटीआईएस ने प्रोजेक्ट की शुरूआत करने के लिए पहले सलाहकार बनकर कंपनी ने परियोजना की गहराई समझ ली और फिर ठेकेदार बनकर उस गोपनीय जानकारी का जमकर अपने फायदे के लिए इस्तेमाल किया। मजे की बात ये है कि मैट्रिक ने जो चार ग्लोबल टेंडर निकाले उसमेें से तीन में नेट्रिप ने खुलकर शिरकत की। ट्रेडिंग के भारतीय प्रतिनिधि शशी सिंह के कांग्रेस से करीबी रिश्ते इस कंपनी के खूब काम आए। ज्ञात हो कि शशी सिंह को काले हिरन शिकार मामले में गिरफ्तार किया गया था। साथ ही वह मंसूर अली खान पटौदी के खासमखास भी है।

ठेका प्रक्रिया का उल्लंघन
तकनीक काम के ठेकों में ठेकेदार के चयन के लिए विशेष स्थापित और मान्य प्र्रक्रिया अपनाई जाती है लेकिन ठेका देने के लिए परंपरागत प्रक्रिया की वजह स्पेशल प्रक्रिया अपनाई गई ताकि अपनी चहेती कंपनी को फायदा पहुंचाया जा सकें। प्रोजेक्ट देने के समय टेक्निकल के लिए ६० अंक दे दिए गए। जबकि टेक्निकल में वास्तविक तौर पर २० अंक होते हैं और बिडर्स क्षमता और र्सिवस सपोर्ट के ४० अंक होते हैं। जबकि ठेके के लिए टेक्निकल के ४० अंक दिए गए। वहीं मान्य प्रक्रिया के तहत वही ठेकदार ठेका पाता है जो कि सबसे कम लागत पर काम पूरा करने की पेशकश करता है। लेकिन इसका भी उल्लंघन किया गया।

कैसे हुआ ये खेल
चार टेंडर के जरिए तीन सौ करोड रूपए की लागत की परियोजनाएं स्थापित होनी थी। पीडब्ल्यूटी-१ में अमेरिकी कंपनी बीईपी तकनीक तौर पर एवीएल पर भारी निकली। २० अगस्त २००८ को नेट्रिप को आंतरिक तकनीक मूल्यांकन रिपोर्ट में बीआईपी को एवीएल से अंक ज्यादा मिले थे। सही तरीके से ये ठेका बीआईपी को मिलना चाहिए था लेकिन उसे ये नहीं मिला। सुरजीत मित्रा और नेट्रिप के सीईओ की पूरी दिलचस्पी ये ठेका एवीएल को दिलाने में थी। लिहाजा आंतरिक मूल्यांकन समिति पर रिपोर्ट बदलने के लिए दबाव डाला गया। तकनीक समिति के मुखिया सौरभ दलेला ने सीईओ को मेल भेजकर इसके बारे में अवगत कराया। एवीएल को कम अंक मिले है इसकी जानकारी एवीएल को पहले ही दे दी गई। परिणामस्वरूप एवीएल ने नेटिस को पत्र लिखकर इस प्रक्रिया में दखल देने को कहा। एवीएल के पत्र में सीधे तौर पर कहा गया कि एनएटीआईएस तकनीक आंकलन के लिए अतिरिक्त नियम बनाए ताकि अधिक अंक र्अिजत करें जा सकें। गौर करने वाली बात है कि ठेके प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए पत्र भेजना ठेके के नियमों के विपरीत है। इसके उल्लंघन के लिए एवीएल को अयोग्य करार दे देना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इन सभी की आंतरिक बैठक २५ अगस्त, २००८ को की गई। तकनीक आकलन की प्रक्रिया में फायदा पहुंचाने के लिए नई प्रक्रियाएं जोडी गई। सीईओ सहित पांच सदस्यों और तकनीक निदेशकों ने आंतरिक बैठक की और अतिरिक्त नियम बनाए जो कि टेंडर के नियम और शर्तों के विपरीत थे। बाद में उन्होंने एक डाक्यूमेंट बनाया जिसमें से सीईओ का नाम हटा दिया गया। यह स्पष्टï करता है कि किस तरह आंतरिक पेपरों में खुलेआम छेडछाड़ की गई। अतिरिक्त जानकारी का इस्तेमाल एवीएल को अधिक अंक देने के लिए किया गया और अंतत: उन्हें सबसे अधिक तकनीक अंक मिले। तकनीक दल के जिस भी सदस्य ने शीर्ष पर बैठे लोगों के हुक्म को मानने से इंकार किया उन्हें धमकाया गया और बेइज्जत किया गया और उन्हें नौकरी से निकालने की धमकी दी गई है।