
चुनौतियों के बीच पहला वर्ष
प्रिय दोस्तों,
मैं यह सम्पादकीय ऐसे समय में लिख रहा हूँ जब डॉयलाग इंडिया का एक वर्ष पूरा हो चुका
है और हम अपना वार्षिकंाक निकाल रहे हैं। पीछे मुड़कर देखें तो इतने कम समय में बिना
किसी राजनीतिक आका और कारपोरेट के सहयोग से मीडिया की तथाकथित चर्चित हस्तियों के
बिना हमने सम्पादन, लेखों, मौलिक चिन्तन एवं दृष्टि बेबाकी व स्पष्टवादिता तथा
प्रसार के क्षेत्रों में अपने आपकों न केवल स्थापित ही किया वरन एक बड़े बु़िद्धजीवी,
राजनीतिक एवं पत्रकारिता वर्ग की सोच एवं चिंतन को नये आयाम दिये। पर्दे के पीछे की
बातों को मंच पर लाने वाले प्रकाशनों की हिन्दी भाषा में कमी ही रही है राष्ट्र में
परिवर्तन की वाहक हिन्दी ही हो सकती है अत: हमने अपने प्रकाशन को हिन्दी में ही
प्रारम्भ किया। और आश्र्चयजनक रूप से हमारी पहुँच एवं पहचान सम्पूर्ण हिन्दी भाषी
प्रदेशों में होने लगी पाठकों ने हमें सच की लड़ाई लडऩे वाले जमीन से जुड़े जुझारू
व परिवर्तन के प्रति उद्यत लोगों में गिना और हमें लगातार हमारी कुव्यवस्था से
सुव्यवस्था लाने की लड़ाई में सहयोग एवं शुुभकामनाएं दी हैं। परिवर्तन की चाह वाले
लोगों का बुद्धिजीवियों एवं समाजसेवियों का हमसे जुड़ाव होता जा रहा है और हम
अनापचौरिक रूप से पूरे देश में 'समान मानसिकता के लोगों के साथ शंखला बद्ध होते जा
रहे हैं। इसका उद्देश्य भी सीध साधा है कि हर गलत बात का विरोध सामूहिक रूप से और
देश के प्रत्येक भाग से एक साथ उठने वाली हर आवाज ईमानदारी और बेईमानी व्यवस्था
समझती है और अगर नहीं समझेगी तो बार-बार लगातार हमारी पत्रिका और हमारे साथ जुड़े
लोग देश भर में ऐसे मुद्दों को उठायेगें और तब तक उठाते रहेंगे जब तक इन्हें
स्वीकार नहीं किया जाता।
अपने पिछले एक वर्ष के बारह अंकों में हमने हर बार एक प्रमुख समस्या का तात्विक विवेचन करते हुए वास्तविकता को पाठकों के सामने लाने का सफल प्रयास किया और समस्या के मर्म को समझते हुए वास्तविक समाधानों को भी सुझाया है। यद्यपि अनेकानेक मुद्दों पर हम अभी स्वयं को और परिपक्व करने की प्रक्रिया में हैं। ताकि समान रूप से राष्ट्र की अधिकांश समस्याओं का स्थायी समाधान संभव हो सके।
हमारी एक और बढ़ी उपलब्धि हमारी बेवसाइट www.dialogueindia.nic.in को बढ़ती लोकप्रियता है। पिछले तीन माह में साइट पर आने वालों में ८०० प्रतिशत का उछाल हमारी बढ़ती और उपलब्ध कराई सामग्री की गुणवत्ता , समसायिकता और सार्थकता को दिखलाता है। हम भारत की सबसे लोकप्रिय अस्सी हजार बेवसाईटों मे शामिल होने जा रहे हैं और हमारे पाठक राजनीतिज्ञ, पत्रकार, लोकसेवक, समाजसेवी, बुद्धिजीवी, अध्यापक, एवं सिविल सर्विसेज व राज्य सेवाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थी हैं। हमारी पत्रिका एक लाख से अधिक लोगों को मेल होती है और हजारों लोग पत्रिका और लेख व अन्य सामग्री हमारी बेवसाइट से डाउनलोड कर रहे हैं। देश के प्रत्येक प्रमुख शहर व २४ से अधिक देशों में वर्तमान में हमें देखा और पढ़ा जा रहा है।
पत्रिका की बड़ी उपलब्धि यह भी है कि पत्रकारिता जगत में इसे अत्यन्त उत्सुकता से पढा जा रहा है। अनेक प्रमुख प्रकाशन हमारे लेखों के अनुरूप अपनी कवर स्टोरी बना रहे हैं हमारे उठाये मुद्दे देश भर में अखबारों, चैनलों व पत्रिकाओं व राजनीतिक वर्ग द्वारा स्वीकार किये जा रहे है और देश भर में बड़ी हलचल पैदा कर रहे हैं। इस कड़ी में सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव हमारा जून २०१० का अंक (आकंठ-भष्टाचार) रहा । 'कॉमन वेल्थ खेलों, की आड़ में हो रहे भ्रष्टाचार का मुद्दा और दस्तावेजों साहित इसका प्रकाशन सर्वप्रथम हमने ही किया और देश के समस्त प्रबुद्ध वर्ग तक पत्रिका को पहुँचाया जिसके उपरान्त पूरा मीडिया जगत इस प्रकरण की परत दर परत उखाडऩे लगा ओर वर्षों में पहली बार भ्रष्टाचार एक बड़ा मुद्दा बनकर उभरा। उम्मीद हैं कि भविष्य में राजनीतिज्ञ नौकरशाही और कारपोरेट जगत का गठजोड़ अपनी मनमानी नहीं कर पायेगा और जनता के विकास के लिए आवंटित धन जनता के लिए ही खर्च होना शुरू हो पायेगा। हमारी कोशिश लगातार यही रहेगी कि विकास बनाम भ्रष्टाचार देश में प्रमुख मुद्दा बना रहे ताकि व्यवस्था पर जनता व मीडिया जगत का चाबुक लगातार बना रहे और देश स्पष्ट एवं सही दिशा में चल सके।










