दाव पर कश्मीर

कश्मीर के हालात एक बार फिर नाजुक हैं। उमर अब्दुल्ला जीरो साबित हुए हैं तो प्रधानमंत्री ने राज्य को स्वायत्ता का संकेत देकर इस्लामी आंतकवाद के हौंसलों को मजबूत ही किया है। कश्मीर पर हमारी सरकारों ने हमेशा से ढीला और अदूरदर्शी रवैया अपनाया है। आखिर क्या कारण है कि सारी सुविधाएं और पैसा दिए जाने के बावजूद घाटी के लोग जिहाद का बिगुल बजाते रहे हैं। इसी पर संपादक : अनुज अग्रवाल का विश्लेषण

न्यूजवीक पत्रिका ने भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को दुनिया के बेहतरतम राजपुरूषों में सबसे ऊपर स्थान दिया है। बिकने के कगार पर बैठी इस पत्रिका ने ऐसा शायद इसलिए किया है क्योंकि मनमोहन सिंह की सरकार हर रोज यूरोप-अमेरिका व आस्ट्रेलिया की किसी न किसी कम्पनी से बड़ा करार कर मोटे ऑर्डर दे रही है और मंदी की आंच में तपते इन महाद्वीपों की गिरती-पड़ती अर्थव्यवस्था को कुछ सांसें भी। शायद मनमोहन सिंह को अगला सम्मान अलकायदा और तालिबान मिलकर देंगे क्योंकि कश्मीर को 'स्वायत्ताÓ देने का संकेत देकर एक प्रकार से उन्होंने 'इस्लामिक आतंकवादÓ को प्रश्रय देने वाली शक्तियों के एजेंडे को लागू करने में सहयोग का संकेत ही दिया है। आश्चर्य नहीं कि कुछ समय बाद मनमोहन सिंह उत्तरपूर्व के राज्यों को भी स्वायत्त दर्जा देने की पहल न कर बैठे। आजादी से अब तक तीन युद्धों और अनवरत आतंकवादी गतिविधियों को झेलने का आदी रहा भारतीय जनमानस, जो अब तक लाखों की संख्या में कुर्बानी दे चुका है ऐसे प्रस्ताव उससे विश्वासघात ही हैं। अपनी अर्कमण्यता, कठोर निर्णय ले पाने की असमर्थता एवं कश्मीर व उत्तर पूर्व को आर्थिक रूप से अनुपयोगी मान लेने की अर्थशास्त्रीय मानसिकता के बीच मनमोहन सिंह के ऐसे प्रस्ताव उनकी संवैधानिक जिम्मेदारियों को दरकिनार करने और राष्ट्रवाद की अवधारणा के विरुद्ध काम करने के संकेत भी देते हैं। देश की आंतरिक समस्याओं महंगाई, मंदी, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, नक्सलवाद, अराजकता, बढ़ते अपराध, लोगों में बढ़ता आर्थिक विभाजन, गरीबी, अल्प विकसित अधोसंरचना और सबसे ऊपर बढ़ता अमेरिकी दबाव, चीन और पाकिस्तान की सामरिक गतिविधियां और इनके बीच इस्लामिक आतंकवाद के बढ़ते कदम जिसकी गूंज केरल से कश्मीर तक हर तरफ सुनाई दे रही है। लगता है मनमोहन सिंह कल्पना लोक में विचरण कर रहे हैं। क्या वे आतंकी गुटों कश्मीर, उत्तरपूर्व एवं नक्सली आंदोलन को आई.एस.आई की मिलती मदद, आई.एस.आई. के तालिबान एवं अलकायदा से संबंध, देश के विभिन्न भागों में मुस्लिम युवाओं की ब्रेनवाशिंग कर भटकाव की राह पर डाले जाने वाली साजिश से परिचित नहीं है। केरल के मुख्यमंत्री वी.अच्युतानंदन का कहना है कि कुछ मुस्लिम अतिवादी गुट केरल को मुस्लिम बहुल प्रदेश में बदलने के लिए मुस्लिम समाज से अधिक बच्चे पैदा करने की मुहिम छेड़े हुए हैं। मुस्लिम बहुत क्षेत्रों में 'लंिवंगजिहादÓ नामक नया हथियार, भ्रमित मुस्लिम युवक इस्तेमाल कर रहे हैं जिसमें बहुसंख्यक वर्ग की लड़कियों को फुसलाकर शादी करना और उन्हें इस्लाम स्वीकार कराना शामिल है। यह भी सच है कि बहुसंख्यक हिंदू समाज में एक छोटे ही सही मगर ऐसे वर्ग का उदय हो चुका है जो 'प्रतिहिंसाÓ को जरुरी समझने लगा है। अभिनव भारत और अन्य अनेक छोटे-छोटे संगठनों के माध्यम से आक्रोशित हिन्दू युवक अल्पसंख्यक समुदाय के विरुद्ध उग्र भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं जिससे समाज में वैमनस्यता की खाई बढ़ रही है।

प्रधानमंत्री का विवादास्पद बयान
प्रधानमंत्री ने माना कि घाटी के लोगों में सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून को लेकर एतराज है, लेकिन वह सैन्यबलों का मनोबल तोडऩे वाला कोई काम नहीं करेंगे। पीएम के मुताबिक, वह इस तैयारी में है कि जल्दी ही वहां से केंद्रीय बल हट जाएं और उनकी जगह राज्य पुलिस ले ले। उन्होंने राज्य के नौजवानों के लिए पर्याप्त संख्या में नौकरियां उपलब्ध करवाने के इरादे से सी.रंगराजन की अध्यक्षता में विशेषज्ञ समूह गठित करने का भी ऐलान किया।

उन्होंने कहा, अगर राजनीतिक सहमति बनती है तो हम संविधान के दायरे में कश्मीर को स्वायत्तता देने को तैयार हैं। सिंह ने कहा, नौजवानों को रोजगार के अवसर मुहैया कराने के लिए बनने वाले समूह में आईटी कंपनी इंफोसिस के संस्थापक एन.आर. नारायण मूर्ति, भारतीय उद्योग परिसंघ (सी.आई.आई) के चीफ मेंटर तरुण दास, पी.नंद कुमार और शकील कलंदर के अलावा राज्य सरकार का एक प्रतिनिधि शामिल होगा। यह समूह निजी और सरकारी दोनों क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा करने की योजना बनाएगा। समूह के तीन माह के अंदर अपनी रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है।

सच तो यह है कि भारत सरकार का ढीला-ढाला रवैया, आधारहीन कश्मीरी नेताओं के विरुद्ध कोई कार्यवाही न करना, आतंकी गुटों से सख्ती से पेश न आना, आक्रमण की जगह अमेरिकी दबाव में पाकिस्तान से बातचीत करना, कश्मीर में कमजोर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को सत्ता में बने रहने देना और देश के मुस्लिम समाज के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक उपायों के स्थान पर उसे वोट बैंक समझ मात्र तुष्टिकरण की नीति पर चलना समस्या की असली जड़ है। पाक अधिकृत कश्मीर की वापसी के लिए सैन्य कार्यवाही समय की मांग की है।

देश में समान नागरिक संहिता, सख्त प्रशासनिक व्यवस्था, कश्मीर से धारा ३७० की समाप्ति, सभी अल्पसंख्यक वर्गों की राजनीति प्रशासन, उद्योग, व्यापार को बराबर की भागीदारी, किसी भी वर्ग के विशेषाधिकारों की समाप्ति समय की आवश्यकता है। सम्पूर्ण समस्या के विविध पहलूओं का विस्तारपूर्वक विवेचन हम आगे कर रहे हैं जिससे स्वयंमेव वास्तविक स्थिति और उसे वास्तविक समाधान सामने आते जायेंगे।