हिंदू आतंकवाद का हौवा

  • बलवीर पुंज: वरिष्ठ पत्रकार एवं राज्यसभा सदस्य - भाजपा

मालेगांव बम धमाके के सिलसिले में पकड़े गए कथित हिंदू आतंकवादियों-साध्वी प्रज्ञा ठाकुर और कर्नल पुरोहित के खिलाफ सबूतों का अभाव और लश्करें तैयबा के आंतकवादी डेविड हेडली के खुलासों से सेकुलर राजनीति की वीभत्सता सत्यापित होती है। यह घटनाक्रम इस कटु सत्य को भी रेखांकित करता है कि राष्ट्रहित वोट बैंक की राजनीति के आगे गौण है। मालेगांव बम धमाके में हिंदू संगठन का नाम आने के बाद से 'हिंदू आतंकवादÓ की संज्ञा उछली। हिंदू और ंिहंदुत्व से दुराग्रह रखने वाले मीडिया के एक वर्ग में इस नई 'संज्ञाÓ में रोजाना नए 'विशेषणÓ जोडऩे की होड़ सी लग गई। इसी कड़ी में हाल ही में एक मीडिया समूह ने यह खुलासा किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबद्ध हिंदूवादी संगठन उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की हत्या करने की साजिश रच रहे हैं।

१५ जून, २००४ को गुजरात पुलिस ने केंद्रीय खुफिया एजेंसी की सूचना के आधार पर लश्करे-तैयबा के चार आतंकियों को मार गिराया था, जिसमें वह इशरत जहां भी शामिल थी जिसे सेकुलरिस्टों का कुनबा तब निर्दोष और भोलीभाली लड़की साबित करने पर अड़ा था। पिछले दिनों हेडली ने इसकी पुष्टि कर दी कि इशरत लश्कर की आंतकवादी थी। तब मीडिया के एक खंड ने उक्त घटना को पाठकों तक इस तरह प्रेषित किया था, जैसे गुजरात की 'हिंदूवादी सरकारÓ ने निरपराध अल्पसंख्यकों को मार गिराया है। २६/११ को मुंंबई पर हुए आंतकी हमले के दौरान मालेगांव बम धमाके में हिंदू संगठन का हाथ ढूंढने वाले महाराष्ट्र आतंक निरोधी दस्ते के प्रमुख हेमंत करकरे शहीद हुए थे। तब भी उनकी मौत के लिए हिंदूवादी संगठनों को कसूरवार ठहराने की कोशिश की गई थी। एक पुस्तक लिखी गई- 'हू किल्ड करकरेÓ और मीडिया में उसकी खूब चर्चा हुई, मानो पुस्तक का एक-एक शब्द ब्रह्मवाक्य हो। प्रशासन तंत्र में हिंदूवादी व्यवस्था के हावी होने की चर्चा करते हुए पुस्तक में लिखा हैं, 'यदि आईबी ने पहले ही हिंदू आतंक का खुलासा कर दिया होता तो ऐसे कई बम धमाके रोके जा सकते थे। -उनकी (हिंदुओं की) योजना शृंखलाबद्ध बम धमाके कर आईबी में मौजूद अपने शुभचिंतकों के माध्यम से उसका ठीकरा मुस्लिम समुदाय पर फोडऩा थी।Ó आश्चर्य की बात है कि भारतीय व्यवस्था में हिंदूवादी प्रभुत्व होने और अल्पंसख्यकों के दोहन की बात करने वाले उपरोक्त पुस्तक के लेखक स्वयं मुसलमान हैं और महाराष्ट्र पुलिस के आईजी रह चुके हैं। यदि मीडिया समूह के हाल के दुष्प्रचार का निहितार्थ निकालें तो हिंदूवादी संगठन उपराष्ट्रपति की हत्या इसलिए करना चाहते हैं, क्योंक वह एक मुसलमान हैं। भारत की सनातनी बहुलतावदी संस्कृति पर यह घृणित लांछन क्या रेखांकित करता है?

जिस भाजपा पर मुस्लिम विरोधी होने का झूठा आरोप लगाया जाता है उसकी सरकार के दौरान ही डॉ- अब्दुल कलाम को राष्ट्रपति पद पर निर्वाचित किया गया था और उनके योगदान पर हर भारतवासी को गर्व है। इस बार आईएएस की परीक्षा में शीर्ष स्थान पर एक मुस्लिम को चुना गया। क्रिकेट और सिनेमा में बहुत से मुस्लिम बंधुओं ने किसी आरक्षण व्यवस्था के कारण अपनी पहचान नहीं बनाई है। यह मुकाम उन्हें अपनी प्रतिभा और बहुसंख्यक समाज के स्नेह के कारण मिला है। भारत में सभी मजहबों को समान अधिकार, संविधान की देन न होकर हिंदुत्व की संस्कृति और दर्शन से सिंचित है, किंतु सेकुलर विकृतियों ने हिंदुत्व को मुसलमान विरोधी बना रखा है। इसीलिए गोधरा को भूलकर गुजरात दंगों और राधाबाई चाल कांड को गौण कर बेस्ट बेकरी की चर्चा होती है। आज देश का चालीस प्रतिशत हिस्सा नक्सली हिंसा का शिकार है। जिहादी इस्लाम कर जहर कश्मीर से कन्याकुमारी तक फैल चुका है। बांग्लादेशी घुसपैठियों के कारण कुछ राज्यों के जनसंख्या स्वरूप में बदलाव के साथ अंातरिक सुरक्षा पर भी खतरा मंडरा रहा है, ंिकंतु सेकुलर सत्ता अधिष्ठान हिंदु आतंक का प्रलाप कर रहा है, जिसे मीडिया के एक वर्ग से समर्थन मिल रहा है।

इस्लामी आतंक के कुछ चेहरे देखिए। पश्चिम बंगाल के नादिया जिले के शांतिपुर थाने में पडऩे वाले मिदेपाड़ा लिचुलता में १२ जुलाई को मुसलमानों का गाजिर मेला चल रहा था। मेले में आए स्थानीय मुसलमान लड़कों के झुंड ने स्कूल से लौट रही १३-१४ वर्षीय तीन हिंदू छात्राओं को अगवा कर लिया और दिनदहाड़े उनके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। बाद में उन्हें मरणासन्न सड़क किनारे छोड़ चले गए। हिंदू लड़कियों के साथ लौट रहीं घटना की चश्मदीद गवाह मुस्लिम छात्राएं कसूरवारों की पहचान से इनकार कर रही हैं। इस घटना को शांतिपुर थाने में रपट दर्ज कराई गई, किंतु कोई कार्रवाई न होने देख पीडि़त पक्ष ने राजमार्ग संख्या ३४ को जाम कर दिया। प्रशासन ने फौरन रैपिड एक्शन फोर्स बुला दिया। प्रशासन ने फौरन रैपिड एक्शन फोर्स बुला लिया। क्या सेकुलर मीडिया ने इस घटना की चर्चा इशरत जहां वाले मामले की तरह की? नहीं। क्यों? दूसरी घटना केरल की है। एक ईसाई कालेज के प्रोफेसर टीजे जोसेफ का हाथ जिहादी युवाओं ने काट लिया। कथित तौर पर जोसेफ ने ईशनिंदा की थी। इसके पांच दिन बाद नीलांबर में यात्री टे्रन के करीब बीस कूपों के हौजपाइप काट डाले गए थे। पिछले एक सप्ताह में केरल के जिहादी तत्वों के संगठन-पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया और सोशलिस्ट डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया के विभिन्न कार्यालयों से भारी मात्रा में गोलाबारूद और घातक हथियारों का जखीरा बरामद किया गया। तटीय क्षेत्रों वाले इन हिस्सों में तबाही के सामान जुटते रहे और सरकार को इसकी सूचना नहीं रही। यह वस्तुत: वोट बैंक के लालच में कांग्रेस और माकपाइयों द्वारा हिजादियों को गले लगाने का ही परिणाम है। चुनाव में कोयंबटूर धमाके के मास्टरमाइंड अब्दुल नासेर मदनी का साथा पाने के लिए कांग्रेस और माकपा में होड़ लगती है। फिलहाल आंतकी गतिविधियों में शामिल होने के कारण मदनी की पत्नी सलाखों के पीछे है तो कर्नाटक पुलिस मदनी से अन्य आतंकी हमलों के बारे में फिर से पूछताछ कर रही है। इन सबकी चर्चा राष्ट्रीय मीडिया में क्यों नहीं?

इस्लामी आतंक का खतरा असम के जनसंाख्यिक स्वरूप पर मंडरा रहा है। यही स्थिति रही तो पूर्वोत्तर एक बार फिर अलगाववाद की चपेट में होगा। यहां बांग्लादेशी घुसपैठियों को बसाकर आईएसआई उनका उपयोग भारत विरोधी गतिविधियों में कर रही है। कुछ दिनों पूर्व काजीरंगा पार्क में घुसपैठियों द्वारा बस्ती बसाने की सूचना सामने आई थी। यह भी जानकारी मिली थी कि मुस्लिम बहुल इलाकों में नक्सली सुरक्षित ठिकाने बनाने में सफल हो रह हैं। जिहादी इस्लाम और नक्सली हिंसा से सभ्य समाज लहूलुहान है, आम जनता आकाश छूती महंगाई के कारण त्रस्त है। इन आसन्न खतरों का सामना करने के बजाए सेकुलर सरकार और मीडिया का एक वर्ग जनता का ध्यान भटकाने के लिए 'हिंदू आतंकÓ का हौवा खड़ा करना चाहता है, परंतु क्या हम इन वास्तविक समस्याओं के प्रति शुतुरमुर्ग वाला रवैया अपना कर भारत की संपभुता को चुनौती दे रहे खतरों का सामना कर सकते हैं?

साभार : दैनिक जागरण