क्रिकेट के हमाम में...

तीन सालों में ही आईपीएल ने सफलता की इतनी जोरदार ऊंचाइयां छुईं कि पूरी दुनिया चकित रह गई। ये लीग दुनिया की दस बड़ी स्पोटर्स लीग में शुमार है। इसके बिजनेस माडल की लोग तारीफ करते नहीं थकते। लेकिन यही आईपीएल अब विवादों से घिरी है। मैच फिक्सिंग, सट्टेबाजी, काला धन, हवाला, टैक्स चोरी, विदेशी मुद्रा कानून का उल्लंघन जैसे गंभीर आरोपों के कारण ये लगातार सुर्खियों में है। ललित मोदी खलनायक में बदल गये लगते हैं। इसके महाघपले में हर कोई शामिल है-ताकतवर मंत्रियों से लेकर बड़े बिजनेस ताइकून और आला हुक्मरान भी।
आईपीएल की घपलागाथा पर रत्ना श्रीवास्तव की पड़ताल

हमारे देश में एक कहावत है पैसे का जोर बड़ा ही भयंकर। जिस जमाने में ये कहावतें गढ़ी गईं, तब समाज का दर्शन तमाम शुचिताओं और नैतिकताओं का आग्रह लिये था। अपने यहां ही नहीं बल्कि काफी हद तक बाहर भी। इसलिए जब ओलंपिक खेल शुरू हुए तो नियम बना -व्यावसायिकता कतई हावी होने नहीं देंगे। मानना था कि पैसा हावी हुआ तो खेल खत्म हो जाएंगे। खेलों के दरवाजे से कुरुपताएं और विसंगतियां घुसी चली आएंगी। ओलंपिक आंदोलन में लंबे समय तक कठोरता से इसका पालन किया गया, कड़ाई इतनी कि अगर मालूम चल जाता कि अमुक खिलाड़ी ने अपने खेल के जरिेए कहीं से पैसा कमाया है तो पदक छीनने में देर नहीं लगती थी। लेकिन दूसरे विश्व युद्ध के बाद अमेरिका की अगुवाई वाले डॉलर कल्चर में दुनिया बदलने लगी। इस नई और बदलती हुई दुनिया में माई-बाप अगर था तो पैसा। इस दुनिया में सब कुछ बिकता था। आदर्श, नैतिक मूल्य और शुचिताएं खारिज हो रही थीं। वाकई दुनिया बदल गई थी। ओलंपिक बदल गये। खेल बदल गये। खेल भी धंधा बन गये। धंधे को लेकर एक बड़ा लोकप्रिय जुमला अक्सर कहा जाता है-धंधा है पर गंदा है। लिहाजा आईपीएल भी इसी गति को पहुंचता दिख रहा है। हर खुलती परत के साथ सामने आ रही है एक स्याह दुनिया। पैसे और पॉवर का गठजोड़। पैसे और ग्लैमर का गठजोड़। पैसे की अनैतिक सांठगांठ। क्रिकेट भी है, क्योंकि माध्यम वही है, आकर्षित करने वाला बाहरी चेहरा भी वही है।

आईपीएल विवाद की शुरुआत ललित मोदी के ट्विटर पर एक छोटे से रहस्योदघाटन के साथ हुई। इसके बाद तो हंगामा ही बरपा हो गया। देश के सबसे बड़े विवादों में एक आईपीएल विवाद में रोज ब रोज एक के बाद एक परतें खुल रही हैं। लग रहा है इस हम्माम में सब नंगे हैं। आईपीएल बोर्ड के चेयरमैन ललित मोदी को इन खेलों को बेहतर तरीके से चलाने की कमान सौंपी गई थी, लेकिन इसे घपला आईपीएल में बदलने में कोई कसर नहीं छोडी़। हर खेल के अपने कुछ उसूल होते हैं लेकिन यहां कोई उसूल नहीं था, अपने कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए सारे नियमों को धता बताया गया। पहला नियम था कि जो लोग खुद आईपीएल की गर्वनिंग बॉडी या बीसीसीआई में हैं, वो किसी टीम को न तो खरीद सकते हैं और न इसमें उनकी हिस्सेदारी होगी। लेकिन हुआ ठीक उल्टा। बोर्ड के कम से कम दो पदाधिकारियों बीसीसीआई कोषाध्यक्ष एन श्रीनिवासन और ललित मोदी ने बहती गंगा में जमकर हाथ धोये। अब खुलासा हो रहा है कि आईपीएल की पहली नीलामी ही फिक्स थी। इसके जरिए मोदी ने या तो अपने ऊंची हैसियत वाले कारपोरेट मालिक दोस्तों को उपकृत किया या अपने रिश्तेदारों का फायदा कराया। रसूखदार नेताओं से गलबहियां थीं, लिहाजा सारे कानून जेब में थे। किसकी मजाल जो हाथ डाल दे। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने आईपीएल की तमाम अनियमितताओं की रिपोर्ट कई महिनों पहले से बनाकर रखी थीं, लेकिन सरकार ने कार्रवाई की हरी झंडी तब दी जब उसके मंत्री शशि थरूर इसमें फंसे और सरकार की जमकर किरकिरी हुई। लिहाजा पलटवार के लिए सरकार ने सारे घोड़े खोल दिये। वैसे ये जगजाहिर है कि जब सरकार किसी बड़े बिजनेसमैन से नाराज हो जाती है तो इनकम टैक्स, प्रवर्तन निदेशालय जैसे विभागों को प्रेसर टैक्टिक की तरह इस्तेमाल किया जाने लगता है। कहा जाता है कि सरकार के जितने कानून हैं, उसमें कोई भी बिजनेस सीधे रास्तों से नहीं किया जा सकता, लिहाजा हर बिजनेस में गड़बड़ी, घालमेलों और दो नंबर के रास्तों की बड़ी गुंजाइश रहती है। सरकार भी ये बात जानती है, इसलिए आमतौर पर चुप रहती है, लेकिन औकात बताने के लिए ये उसके अचूक नुस्खे हैं, जिसमें कोई भी कैसे भी फंसाया जा सकता है।
अब इनकम टैक्स की टीमें पूरे देश में आईपीएल फ्रेंचाइची के आफिसों में छापे मार रही हैं, जिन बिजनेस हाउसेज ने आईपीएल में टीमें खरीद रखी हैं, उनमें बदहवासी है। लेकिन आईपीएल को लेकर गंभीर आरोप दूसरे हैं, जिसमें मैच फिक्सिंग से लेकर सट्टेबाजी, काले धन का बड़ा प्रवाह, हवाला, विदेशी स्रोतों से संदिग्ध तरीके से धन का आना और टैक्स हैवन देशों के बैंकों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल आदि शामिल हैं।

ये सारी बातें पहले से ही चर्चाओं में थीं लेकिन किसी में कुछ कहने की हिम्मत नहीं थी। इसलिए क्योंकि आईपीएल से बड़े नेता, मंत्री, हुक्मरान, अफसर, बिजनेसमैन सब जुडे हुए हैं। थरूर अगर कोच्चि टीम को फ्रेंचाइजी बनाने के लालायित थे। तो शरद पवार के दामाद सदानंद सुले के पास ब्राडकास्टिंग कंपनी मल्टी स्क्रीन मीडिया (एमएसएम) के दस फीसदी हिस्सेदारी है। उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल की बेटी पूर्णा पटेल मोदी के साथ काम करती हैं। उनके एक इशारे पर इंडियन एयरलाइंस की रेगुलर विमान सेवाओं को चंद घंटे में चाटर्ड सेवा में बदल दिया जाता है। यात्री भले ही परेशान होते रहें लेकिन आईपीएल के खिलाड़ी आराम से चंडीगढ़ से चेन्नई या जयपुर से मुंबई पहुंचा दिये जाते हैं। ऐसा और भी मामलों में हुआ होगा। पटेल के आफिस से आईपीएल नीलामी संबंधी ई मेल आगे फारवर्ड किये जाते हैं। शरद पावर ताकतवर मंत्री हैं। वैसे तो उनका कहना है कि आईपीेएल से उनका कोई लेना देना नहीं बल्कि बीसीसीआई में भी वो नहीं हैं, लेकिन मोदी को समझाने बुझाने का जिम्मा केंद्र की यूपीए सरकार उन्हीं को सौंपती है, बीसीसीआई के अध्यक्ष शशांक मनोहर उन्हीं से मिलने दिल्ली आते हैं। कोच्चि फ्रेंचाइजी के मालिक भी अपनी गुहार लेकर उन्हीं के पास पहुंचते हैं। पवार भले ही सामने नहीं हों लेकिन पर्दे के पीछे बीसीसीआई की सियासत उन्हीं की मर्जी पर चलती है। साफ है कि महाराष्ट्र और गुजरात के बड़े नेताओं की आईपीएल में खास दिलचस्पी रही है। चूंकि ये लग गया था कि आईपीएल वाकई पैसों की खान है, यहां पैसा लगाने का मतलब मुनाफा ही मुनाफा है तो बड़े बिजनेस हाउसेज के साथ साथ अंडरवल्र्ड भी सक्रिय हो गया था।

इनकम टैक्स चोरी, विदेशी मुद्रा नियमों का उल्लंघन, फिक्स नीलामी, और विदेशी बैंकों के जरिए आये पैसों के गोलमाल को देखा जाये तो आईपीएल का कुल टैक्स चोरी ही कम से कम 500 करोड़ की होने जा रही है। इसमें काले धन का खेल, अंडरवर्ल्ड से लिंक, मैच फिक्सिंग और सट्टेबाजी का खेल अलग है। बड़े पैमाने पर विदेशी धरती की तमाम नामी और बेनामी कंपनियों से फ्रेंचाइजी के लिए ट्रांसफर किये जाने वाले मोटे धन की अनियमितताएं भी अलग हैं। आईपीएल के लिए विदेशों से आने वाला ज्यादातर पैसा मॉरीशस, ब्रिटेन और अमेरिका के रास्ता आता था।
इस विवाद के बाद दो ही बातें होंगी या तो हमारी क्रिकेट व आईपीएल कहीं ज्यादा पारदर्शी व साफसुथरी हो जायेगी या फिर आर्थिक तौर पर इसकी कमर टूट जायेगी, हालांकि इसकी आशंका नहीं के बराबर है। देश में क्रिकेट के क्रेज को देखते हुए ऐसा नहीं लगता। हकीकत ये है कि बाजार को क्रिकेट की जरूरत है, लेकिन ज्यादा बेहतर है कि ये क्रिकेट साफसुथरी हो न कि फिक्स।

ये भी सुखद है कि ये सारी गड़बडिय़ां अगर कुछ साल बाद पता चलतीं तो इतनी बड़ी होतीं कि वाकई चूलें हिला देतीं, इतनी जल्दी इनसे दो चार होने का मतलब है कि सफाई का मौका कुछ ज्यादा जल्दी ही मिल गया।
बीसीसीआई और दूसरे हल्कों में भी लोग आईपीएल में रही गड़बडिय़ों से शायद वाकिफ थे लेकिन साधारण हालात में उनमें इतनी हिम्मत नहीं थी कि मोदी के खिलाफ आवाज उठा सकें। मोदी ने बेशक आईपीएल को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया, इसकी लोकप्रियता को चार चांद लगा दिये। लेकिन नुकसान ये हुआ कि क्रिकेट और क्रिकेटरों पर पैसा की ताकत हावी हो गई। इसी के चलते कई फ्रेंचाइचीज ने बड़े बड़े क्रिकेटरों के साथ कई बार बेहद अभद्र व्यवहार भी किया। आईपीएल को कवर करने वाले पत्रकार बताते हैं कि फ्रेंचाइचीज के मालिकों के दबाव के चलते क्रिकेटर हमेशा ज्यादा तनाव में होते थे। ये बातें भी कही जाने लगी थीं कि अमुक टीम के मालिक ने मैच के बाद अमुक कप्तान की क्लास ले ली। हमारे महानतम खिलाडिय़ों को भी इन मालिकों के सामने निरीह होकर सफाई देनी पड़ती है। खिलाडिय़ों के कद को प्यादा बना दिया गया। फ्रेंचाइचीज को सही-गलत तमाम मनमानियों की छूट दे दी गई। मसलन खिलाडिय़ों के लिए मैच के बाद देर रात तक आईपीएल की पार्टियों में मौजूद होना जरूरी कर दिया गया। यानि अगर खिलाड़ी मैच में खेलकर थके हों, आराम करना चाहते हों तो वो ऐसा नहीं कर सकते। आईपीएल की रात की पार्टियां में क्या होता है, ये बात किसी से छिपी नहीं है। अफसोस की बात ये है कि दुनियाभर की लोकप्रिय स्पोट्र्स लीग का कमोवेश यही हाल है। खेल तो मैदान में खेले जाते हैं लेकिन उसका असली रिमोट कंट्रोल बोर्ड रुम में बैठे चंद लोगों के हाथ में होता है, जिन्हें नफा चाहिए केवल नफा, और ऐसे में पूरी दुनिया में स्पोट्र्स लीग के जरिए पैसा कमाने के गलत और सही इतने दरवाजे खुले हुए हैं कि पूछिये मत। अगर सामने के दरवाजे स्पांसरशिप, मर्चेंटाइजिंग, ब्राडकास्टिंग राइट्स , ब्रांड प्रोमोशन और टिकट मनी के हैं तो पीछे के दरवाजे काली गलियों में खुलते हैं।

आईपीएल के असली विवाद की ओर लौटते हैं। किस्से की शुरुआत हुई 21 मार्च से, जब आईपीएल के लिए दो नई फ्रेंचाइचीज की बोली लगी। दो बड़े बिजनेस घराने वीडियोकान और अडानी ग्रुप दौड़ में सबसे आगे थे। बताते हैं कि इन्हें महाराष्ट्र और गुजरात के आला और खासे प्रभावशाली राजनीतिज्ञों का समर्थन भी हासिल था। लेकिन जब नीलामी के बाद तस्वीर साफ हुई तो हैरतअंगेज तरीके से ये दोनों बिजनेस हाउसेज पीछे छूट गये और जो दो फ्रेंचाइची बाजी मार ले गईं उनमें थीं पुणे से सहारा ग्रुप और कोच्चि के लिए रांदेवू कंसोर्टियम। सहारा ने करीब 1750 करोड़ रुपये में बाजी मारी और रांदेवू ने 1533 करोड़ रुपये की बोली लगाकर किला फतेह किया। बिजनेस को जानने वाले लोगों का कहना है कि इतना पैसा लगाकर अगले दस सालों में भी शायद ही ये फ्रेंचाइचीज फायदा वसूल पाएंगी। जब तीन साल पहले आईपीएल शुरू हुआ था, तब ऊंची बोली लगाने वाले बिजनेस हाउसेज और बॉलीवुड सेलिब्रिटिज के बारे में भी यही कहा गया था लेकिन बताया जाता है कि आज की तारीख में कोई भी फ्रेंचाइजी घाटे में नहीं है। पैसा बेतहाशा आ रहा है, आने के रास्ते भी कई हैं। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की लीक हुई रिपोर्ट पर गौर करें तो होश उड़ जाएंगे और लगेगा कि हे भगवान खेल के नाम पर ये क्या हो रहा है। बल्कि यों कह लीजिये कि क्या नहीं हो रहा है।

मैच फिक्सिंग
आईटी रिपोर्ट के अनुसार आईपीएल में मैच फिक्सिंग होती थी। माना जा रहा है कि राजस्थान रॉयल्स, किंग्स इलेवन पंजाब और कोलकाता नाइट राइडर्स टीम के भी कुछ मैच फिक्स थे। विदेशी कप्तान भी इसमें साथ देते थे। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की ये रिपोर्ट केवल पहले और दूसरे आईपीएल टूर्नामेंटों की है। इसमें मौजूदा आईपीएल शामिल नहीं है। बताया जाता है कि ये सब आईपीएल के चेयरमैन ललित मोदी की जानकारी में था। जिन तीन टीमों का जिक्र हो रहा था, उन तीनों में ही न केवल ललित मोदी के पर्दे के पीछे से शेयर बताये जाते हैं बल्कि इन तीनों ही उनकी खासी दिलचस्पी हुआ करती थी। किंग्स इलेवन में उनके दामाद गौरव बर्मन के शेयर हैं, साथ ही आकाश अरोरा के जरिए भी ललित मोदी का इसमें हिस्सा है। वहीं राजस्थान रायल्स में भी मोदी के रिश्तेदार हैं। कोलकाता नाइट राइडर्स में जय मेहता द्वारा लगाये गये धन में भी मोदी कहीं पर्दे के पीछे छिपे बताये जाते हैं। हालांकि तीनों ही फेंचाइची इससे इनकार करती हैं।

सट्टेबाजी
क्या आप सोच सकते हैं कि आईपीएल के मैचों को लेकर ब्रिटेन मे मोटी सट्टेबाजी होती थी साथ ही साथ भारत में भी धडल्ले से ये काम हो रहा था। ये काम करने वाले भी वो लोग हैं, जो मोदी के आसपास काफी देखे जाते रहे हैं। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट 15 ऐसी विदेशी वेबसाइट्स में हुए लेन देन की जांच कर रहा है, जो भारतीय नागरिकों की सट्टेबाजी को न केवल स्वीकार करती हैं बल्कि आईपीएल मैचों पर सट्टेबाजी की भी इजाजत देती थीं। भारत में सट्टेबाजी अवैध है। ऐसे में भारतीय लोग सट्टेबाजों के जरिए विदेशों में सट्टे में पैसा लगाते हैं, जो वहां वैध होता है। जिन चार विदेशी वेबसाइट्स पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की खास नजर है, वो है बेट 365, विलियम हिल, लैडब्रोक्स और बेटफेयर। इन विदेशी वेबसाइट्स पर पैसा लगाने वाले भारतीयों का भी आईटी अफसर पता लगा रहे हैं।

विदेशी धरती से संदिग्ध लेनदेन
तमाम फ्रेंचाइचीज को देखें और विदेश में उनके फंडों की आवाजाही के खेल को देखें तो दिमाग चकरा जायेगा। खासकर ये संदिग्ध आवाजाही राजस्थान रायल्स के लिए आये धन को लेकर है। इसमें धन विदेश में इतने स्रोतों से आया है कि ताज्जुब होता है कि ऐसा क्यों किया गया।

सिर्फ यही नहीं मनी लांड्रिंग और काला धन का भी खूब इस्तेमाल हुआ। इनकम टैक्स के छापों के बाद सरकार का प्रवर्तन निदेशालय और दूसरी एजेंसीज भी हरकत में आईं। यही कारण था कि अप्रैल में न केवल आईपीएल और ललित मोदी के आफिसों पर छापे पड़े बल्कि बीसीसीआई के कागजों को भी खंगाला गया। देशभर की सारी आईपीएल फ्रेंचाइचीज के आफिसों पर भी छापे डालकर शिकंजा कस दिया गया है। केवल यही नहीं आंच अब आईपीएल के क्रिकेटरों तक भी पहुंच रही है। आईटी डिपार्टमेंट ने सभी क्रिकेटरों को नोटिस भेजकर आईपीएल की कमाई का हिसाब देने को कहा है। तमाम फ्रेंचाइचीज आईपीएल का पैसा आईपीएल के अकाउंट में डालने की बजाये मोदी के अकाउंट में डालती थीं। रॉयल बैंक आफ स्काटलैंड में मोदी के खाते से इस बात की तसदीक हुई है कि विदेश से कई फ्रेंचाइचीज का पैसा इस अकाउंट में आता था। केवल यही नहीं बल्कि आईपीएल में खेल रहे विदेशी खिलाडिय़ों को पैसा भी टैक्स हेवन देशों के जरिये भुगतान किया जाता था।

अंडरवर्ल्ड कनेक्शन
आरोप तो ये भी लगा है कि आईपीएल में अंडरवल्र्ड का पैसा लगा है, प्रवर्तन निदेशालय इसकी जांच कर रहा है। कोच्चि कंसोर्टियम की हिस्सेदार और पूर्व राज्य मंत्री शशि थरूर की मित्र सुनंदा पुष्कर ने खुलेआम आरोप लगाया है कि बड़े पैमाने में अंडरवर्ल्ड का पैसा दुबई के रास्ते आईपीएल में लगाया जा रहा है।

नीलामी भी फिक्स
तीन साल पहले जब आईपीएल की शुरुआत हो रही थी तो उस समय उसकी नीलामी प्रक्रिया को जानबूझकर कुछ लोगों के फायदे के लिए शिथिल किया गया। इनसाइडर इनफार्मेशन लीक की गई। याद करिये कि तब कुछ दावेदार जो दौड़ में पीछे छूट गये थे, उनका और जीतने वाली फ्रेंचाइचीज मार्जिन बहुत ही कम था। ये बात राजस्थान रॉयल्स, किंग्स इलेवन और कोलकाता नाइट राइडर्स की नीलामी के दौरान तो लोगों को महसूस भी हुआ। राजस्थान रॉयल्स के लिए अनिल अंबानी की कंपनी ने भी बोली लगाई थी लेकिन महज कुछ करोड़ रुपये से वो इससे वंचित रह गई थी। आईटी के सूत्रों का कहना है कि ललित मोदी ने जानबूझकर नीलामी की गोपनीय जानकारियां अपने परिचितों तक पहुंचाई, जिससे उनका फायदा हो और पहचान के लोग आईपीएल में रहें।

आम से भी मालमाल और गुठली से भी
सफेद स्रोतों की बात करें तो भी आईपीएल की कमाई कम नहीं है। फिर देर रात तक चलने वाली पार्टियों से भी बेतहाशा पैसा जुटा। स्टेडियम में ठसाठस रहे। खूब टिकटों की मारामारी हुई। इंटरनेट पर टिकट कब बुक हो गये पता ही नहीं चला लेकिन ब्लैक मार्केट में इन टिकट्स के बिकने की भी खबरें हैं। लब्बोलुआब ये है कि इन फ्रेंचाइचीज के हाथों में अब ऐसे आम हैं, जिनसे तो इन्हें पैसा मिल ही रहा है, साथ ही इसकी गुठली भी उन्हें मालामाल कर रही है।

विवाद शुरू क्यों हुआ
सवाल ये है कि आईपीएल विवाद के बीज पड़े क्यों। क्यों ललित मोदी ने ऐसा कदम उठाया, जिससे विवादों का पूरा पिटारा खुल गया और उसकी आग में वो खुद झुलसने से बच नहीं पाये। आईपीएल विवाद के असली बीज पड़े नई फ्रेंचाइजी के तौर पर कोच्ची कंसोर्टियम के जीतने से। लोगों को यकीन नहीं हो रहा था कि रातों रात खड़ी हुए कोच्चि कंसोर्टियम आखिरकार कैसे ये नीलामी बाजी मार ले गई। कोच्चि फ्रेंचाइजी के इस कंसोर्टियम में आमतौर पर बड़े फाइनेंसर और बिजनेसमैन हैं, लेकिन इन्हें एकजुट किया रांदेवू स्पोट्स ने, जिसके मुख्य कर्ताधर्ता हैं शैलेंद्र गायकवाड़ और पूजा गुलाटी। इन लोगों ने विदेश राज्यमंत्री शशि थरूर से समर्थन जुटवाया, उनके प्रभाव का इस्तेमाल किया।

बताते हैं कि बाद में कोच्चि फ्रेंचाइचीज पर आईपीएल की दौड़ से वापस हटने या अपना हिस्सा बेचने का दबाव पडऩे लगा। बताया जाता है दबाव डालने वालों में महाराष्ट्र और गुजरात के प्रभावशाली नेता थे और ललित मोदी भी कहीं न कहीं उनका साथ दे रहे थे। ये तपिश इतनी ज्यादा थी कि कोच्चि कंसोर्टियम के कर्ताधर्ता फिर थरूर की ओर दौड़े, मदद की गुहार की। थरूर ने कांग्रेस के एक बेहद बड़े नेता से बात की। इस बीच ये भी महसूस होने लगा कि कोच्चि कंसोर्टियम में भी खेल चल रहा है। इसमें एक बडे बैंक अधिकारी का नाम आया, जिसने बड़े बड़े फाइनेंसर को सब्जबाग दिखाकर साथ जुटाया था। कयास ये हैं कि डील के मुताबिक पूरा पैसा फाइनेंसर्स को लगाना था बदले में रांदेवू स्पोट्र्स को 26 फीसदी शेयर देने थे। रांदेवू स्पोटर्स ने जब अपने अपने इन शेयरों में 25 फीसदी हिस्सा मुफ्त में बांट दिया, यहां तक भी ठीक था, लेकिन जब ललित मोदी को ये पता लगा कि इसमें से 18 फीसदी शेयर सुनंदा पुष्कर को मिले हैं जो शशि की खास मित्र हैं, तो उन्हें मौका मिल गया।

मोदी कई बातों से नाराज थे। इसकी पृष्ठभूमि में वो दो नई फ्रेंचाइचीज के लिए पहली बिड का खारिज कर दिया जाना भी था। बताया जाता है कि ये पहली बिड फिक्स थी। मोदी अपनी दो पसंदीदा फ्रेंचाइचीज के लिए बिड फिक्स कर चुके थे लेकिन इसे बीसीसीआई अध्यक्ष शशांक मनोहर के कारण इसे कैंसिल करके सही तरीके से दूसरी बार बिड करानी पड़ी थी। मोदी इस बात से भी नाराज थे कि कोच्चि फ्रेंचाइजी ने बीसीसीआई के अध्यक्ष शशांक मनोहर से उनकी शिकायत की थी कि मोदी न केवल उन पर वापस हटने का दबाव डाल रहे हैं बल्कि सारे हिस्सेदारों की स्थिति पर सवाल उठा रहे हैं। शशांक मनोहर इस बात को लेकर मोदी को ईमेल के जरिए लताड़ चुके थे। लिहाजा मोदी ने मौके को ताड़ा, बताते हैं कि महाराष्ट्र और गुजरात के नेताओं ने उन्हें भरोसा दिया था कि वो इस मामले को सामने लाएं। आगे का मामला उन पर छोड़ दें। इसी रणनीति के तहत मोदी ने ट्विटर पर सुनंदा का नाम उजागर किया। बस इसके बाद तो भूचाल आ गया, जो आना ही था। थरूर का कोच्चि को समर्थन जगजाहिर था, ऐसे में जब उनकी मित्र सुनंदा को करीब 80 करोड़ रुपये के शेयर मुफ्त इक्विटी के तौर पर दिये गये, तो अंदाज स्वाभाविक था कि ये पैसे यूं ही नहीं मिले हैं बल्कि थरूर की सेवाओं के बदले सुनंदा को गिफ्ट किये गये हैं। सुनंदा का तर्क भी गले से नहीं उतरता कि ये उनकी सेलरी के तौर पर उन्हें दिया गया है।
सही बात ये है कि थरूर कितना भी कहें लेकिन खुद कांग्रेस में उनकी बात पर अविश्वास करने वाले नेताओं का एक बहुत बड़ा वर्ग है। ये जवाब देना वाकई आसान नहीं है कि कोई यूं ही 80 करोड़ रुपये सुनंदा पुष्कर को क्यों दे देगा। आखिरकार थरूर को इस्तीफा देना ही पड़ा। लेकिन इस इस्तीफे ने आग में घी का काम किया। केंद्र सरकार अब पूरी तरह से आईपीएल के उस सारे खेल को बेनकाब करने में जुट गई है, जिसे वो चुपचाप पिछले दो साल से देख रही थी। इस बीच उसके कई विभाग आईपीएल की गंभीर गड़बडिय़ों का कच्चा - चिट्ठा इकट्ठा कर चुके थे।

मोदी की ताकत भी कम नहीं
मोदी की लॉबी भी हल्की कतई नहीं है। इसमें शरद पवार, प्रफुल्ल पटेल और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे लोग कहीं न कहीं से उनके साथ हैं या उनके प्रति नरम रवैया रखते हैं। मोदी के पीछे बड़े उद्योग घराने भी हैं। इनमें रिलायंस से लेकर माल्या तक हैं। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के तो वो खासे नजदीकी हैं ही। जब वसुधंरा राजस्थान की मुख्यमंत्री थीं तब मोदी को लोग डिफेक्टो सीएम कहने लगे थे। हकीकत ये भी है कि पिछले दो सालों में ही मोदी की दौलत कई गुना बढ़ गई है। आयकर विभाग के अनुसार वो एक प्राइवेट जेट के साथ मर्सीडीज और बीएमडब्ल्यू कारों के बेडे के मालिक हैं। मुंबई से दूर समुद्र में उनका एक प्राइवटे याट खड़ा है। उनका बेटा जब मुंबई में निकलता है तो कारों का पूरा काफिला उसके साथ चलता है। उसकी सुरक्षा में कई गार्ड लगे होते हैं। उसकी लाइफस्टाइल बॉलीवुड स्टार्स को भी मात करने वाली है।

क्या है आईपीएल की कीमत
महज तीन साल में ही आईपीएल की कुल कीमत 20,000 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। इसमें हम सट्टे के रूप में लगने वाले हजारों करोड़ को नहीं जोड़ रहे। यहां ये बताना जरूरी है कि हमारे देश के खेल बजट से आईपीएल के पैसों की दुनिया चार गुनी से ज्यादा बड़ी है, और ये और भी ज्यादा बड़ी होती जायेगी। दुनिया के दस सबसे धनी स्पोट्र्स लीग में इसे शुमार किया जा रहा है। ब्रिटेन की इंग्लिश प्रीमियर लीग में फुटबाल के क्लब के मालिकों का दबदबा वहां के मंत्रियों से ज्यादा माना जाता है। भले ही ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था सिकुड़ रही हो लेकिन इंग्लिश प्रीमियर लीग के क्लब मोटा मुनाफा कमाने में लगे हैं।

इस लेख को पढऩे तक ललित मोदी को आईपीएल में हाशिये पर सरकाया जा चुका होगा। लेकिन सबसे बड़ी बात ये ही है कि आईपीएल और बीसीसीआई ने इस प्रकरण से क्या सबक सीखा है। आईपीएल की एक स्वायत्त संस्था बनाई जानी चाहिए। जिसका एक सुव्यवस्थित ढांचा हो, हिसाब-किताब की पूरी पारदर्शी व्यवस्था हो। पैसे जरूर कमाये जाएं लेकिन खेल को खेल ही रहने दें।

अपसेट हूं : पटौदी

आईपीएल पर तमाम तरह के जो आरोप लगे हैं, उसके बारे में आप क्या सोचते हैं?
मैं इससे अपसेट हुआ हूं। वैसे इसमें अभी कई आरोपों को साबित होना बाकी है। सरकार इसे गंभीरता से ले रही है, मुझे लगता है कि अगर आईपीएल में गंदगी हुई है तो उसकी सफाई का मौका आ गया है।

क्या मौजूदा स्थिति से क्रिकेट की इमेज पर असर पडेगा, आखिर ये वो खेल है, जिसके देश में करोड़ों दीवाने हैं?
मुझे लगता है कि बीसीसीआई के पास कुछ करने का बढिया मौका है, जिससे लोगों को लगेगा कि क्रिकेट बोर्ड तमाम हितों से ऊपर उठकर काम कर रहा है।

एक प्रोडक्ट के रूप में आईपीएल के बारे में क्या ख्याल है?
एक प्रोडक्ट के रूप में वाकई आईपीएल काफी शानदार प्रोडक्ट है। मैं उन लोगों से असहमत हूं, जो इसे केवल बिजनेस का पर्याय बताते हैं। मसलन मैं चीयरलीडर्स को लेकर इत्तफाक नहीं रखता।

कुछ नेता आईपीएल पर बैन लगाने और इसे नेशनलाइज्ड करने की बात कर रहे हैं? आप क्या कहेंगे?
नहीं मैं आईपीएल को बैन करने के पूरी तरह खिलाफ हूं, अगर आप आईपीएल को बैन कर रहे हैं तो आपको पूरी तरह क्रिकेट पर भी रोक लगा देनी चाहिए। आईपीएल एकदम साफसुथरा है अलबत्ता उसके इर्द गिर्द का पानी जरूर गंदा है। तो इस पानी को साफ करने की जरूरत है।


आईपीएल पर मैच फिक्सिंग और सट्टेबाजी के आरोप भी लगे हैं। क्या आईपीएल गर्वनिंग बॉडी को इस बारे में कोई जानकारी थी और उसने इसके मद्देनजर कोई कदम उठाये थे?
आईपीएल पूरी तरह से आईसीसी नियमों का पालन करता है और अगर मैच फिक्सिंग और सट्टेबाजी के आरोप लग रहे हैं तो आप उसके लिए आईपीएल को दोषी नहीं ठहरा सकते। ये प्रोडक्ट है ही ऐसा कि कुछ ऐसी चीजें उसकी ओर आ सकती हैं, जो सही नहीं हैं, लेकिन मेरे ख्याल से अगर आप सट्टेबाजी रोकना चाहते हैं तो इसे ओपन कर देना चाहिए।

मीडिया का कहना है कि ललित मोदी के पास मर्सीडीज और बीएमडब्ल्यू कारों का काफिला है, प्राइवेट जेट हैं, यहां तक की याट भी। क्या आप इस बात से इत्तफाक रखते हैं उन्होंने अपने व्यवसाय को बढ़ाने के लिए आईपीएल का इस्तेमाल किया?
नहीं, ऐसा कहना ठीक नहीं होगा। हां, ये जरूर हो सकता है कि जिस तरह मिस्टर मोदी काम करते हैं, उससे वो तमाम लोगों को अपसेट जरूर करते हैं, वहीं दूसरी ओर मैं किसी ऐसे शख्स को नहीं जानता, जो इतनी कड़ी मेहनत करता हो, वास्तव में वो एक दिन में बीस घंटे काम करते हैं।

लेकिन जिस तरह की इमेज उनकी है, क्या वह आईपीएल चेयरमैन की होनी चाहिए?
वो अपनी इस इमेज को कई सालों में भी नहीं बदल पाये हैं, और ऐसा इसलिए भी है क्योंकि वो कमिश्नर के तौर पर नियुक्त किये गये थे।

आईपीएल फ्रेंचाइचीज और उनके हिस्सेदार

कोलकाता नाइट राइडर्स

  • शाहरुख खान 65%

  • जय मेहता 35%

किंग्स इलेवन पंजाब

  • प्रिटी जिंटा 22%

  • नेस वाडिया 26%

  • करन पाल 12%

  • मोहित बर्मन 40%

राजस्थान रॉयल्स

  • लचलेन मुर्डोक 33.33%

  • आदित्य और सुरेश चेलाराम 21.6%

  • राज कुंदरा और शिल्पा शेट्टी 11.6%

डेल्ही डेयरडेविल्स

  • नरेश गणपार्थी 100%

  • बेंगलूर रायल चैलेंजर्स

  • विजय माल्या 100%

चेन्नई सुपर किंग्स

  • इंडिया सीमेंट 100%

मुंबई इंडियन

  • रिलायंस इंड़स्ट्रीज 100%

डेक्कन चार्जर्स

  • डेक्कन चार्जर्स स्पोर्टिंग वेंचर लिमिटेड 100%

पुणे

  • सहारा ग्रुप 100%

कोच्चि

  • मेहताश फिल्म वेब्स कंबाइन 12%

  • मेहुल शाह एंकर अर्थ 27%

  • विवेक वेणुगोपाल एलीट ग्रुप 1%

  • विपुल शाह पाणिनी डेवलपर्स 26%

  • आनंद शाह आनंद एस्टेट 8%

  • सत्यजीत गायकवाड़, रांदेवू स्पोटर्स

  • 25% फ्री इक्विटी का 75.4%

  • 18% सुनंदा पुष्कर 6.6 % अन्य

गायकवाड परिवार पर शिकंजा
आयकर विभाग ने कोच्चि टीम से जुड़े गायकवाड परिवार पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इस परिवार की करोड़ों की कमाई के स्रोत को खंगालने का काम शुरू हो गया है। आयकर विभाग के अधिकारियों ने सोलापुर जाकर गायकवाड परिवार के बैंक खातों की जांच की है। सबसे पहले रवि गायकवाड के खातों को आयकर विभाग ने खंगाला। रवि विवादास्पद कोच्चि टीम को खरीदने वाली कंपनी रांदेव्यू स्पोट्र्स वल्र्ड के पूर्व सीईओ शैलेंद्र गायकवाड के भाई हैं। रवि महाराष्ट्र के आरटीओ विभाग के वरिष्ठ अधिकारी हैं और वह आयतित कारों के रजिस्ट्रेशन टैक्स के घोटाले में फंसे हुए हैं। रवि उस समय सुर्खियों में आए थे जब उन्होंने मास्टर ब्लास्टर सचिन तेदुलकर के विदेशी फरारी के रजिस्ट्रेशन टैक्स में कथित रूप से घोटाला किया था। यह भी चर्चा है कि सरकारी कर्मचारी रवि भी रांदेव्यू में हिस्सेदार हैं।

कोच्चि टीम के विवाद में आने के बाद पूर्वविदेश राज्यमंत्री शशि थरूर और सुनंदा पुष्कर के साथ गायकवाड परिवार भी चर्चा में आया। इस परिवार के बारे में कहा जा रहा है कि रांदेव्यू में 225 करोड़ रुपये का निवेश करके 30 फीसदी शेयर ले लिया है। यह भी कहा जा रहा है कि सुनंदा की तरह ही उन्हें स्वीट इक्विटी दी गई है। हालांकि, रांदेव्यू के प्रवक्ता और शैलेंद्र के चचेरे भाई सत्यजित गायकवाड ने कहा है कि रांदेव्यू में रवि का हिस्सा नहीं है। सत्यजित का कहना है कि सोलापुर का यह गायकवाड परिवार मध्यम वर्गीय मराठा परिवार है और मेहनत की कमाई से करोड़पति बना है। उन्होंने कहा कि गायकवाड परिवार हर जांच के लिए तैयार है।

सोलापुर में भी गायकवाड परिवार के करोड़पति होने पर आश्चर्य व्यक्त किया जा रहा है। शैलेंद्र के पिता किसनराव ङ्क्षसचाई विभाग में एक अधिकारी थे। शैलेंद्र खुद मैकेनिकल इंजीनियर हैं। उनके भाई रवि आरटीओ में अफसर हैं। रवि आयतित कारों के टैक्स घोटाले में शामिल हैं। इसलिए महाराष्ट्र सरकार उनके निलंबन के लिए जांच करा रही है। क्रिकेट से जुडऩे के लिए इस परिवार ने सोलापुर में पुष्पा क्रिकेट अकादमी की स्थापना की। रवि की वजह से उनकी बहन प्रतिभा की शादी में सचिन शामिल हुए थे और अकादमी के एक कार्यक्रम में एक केंद्रीय मंत्री की विधायक बेटी भी उपस्थित थीं। रांदेव्यू के शेयर खरीदने में शैलेंद्र और रवि के दोस्तों ने भी कथित रूप से आर्थिक सहयोग किया है। शैलेंद्र के दोस्त जयंत कोटलवर और उनके भाई हेमंत कोटलवर का नाम उजागर हुआ है। कोटलवर बंधु मूल रूप से लातुर के रहने वाले हैं। जयंत विदेश में व्यवसाय करते हैं और हेमंत के विदेश राज्य मंत्रालय के प्रणीत कौर से भी दोस्ती बताई जाती है।

फेमा की तलवार
आईपीएल और फ्रेंचाइजी पर फेमा की तलवार लटक रही है। प्रवर्तन निदेशालय की ओर से आईपीएल के खिलाफ फेमा के तहत केस दर्ज करने की तैयारी की जा रही है। अगर ये हुआ तो आईपीएल के कमिश्नर ललित मोदी और सभी फ्रेंचाइजी मुसीबत में आ सकते हैं। सभी फ्रेंचाइजी की बोली डॉलर में लगी है।
उसके भुगतान भी डॉलर में होने की जानकारी मिली हैं। इस बारे में प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारी कुछ समय से जांच कर रहे थे। अधिकारियों को फेमा के उल्लंघन के कुछ सबूत हाथ लगे हैं। इसलिए अब फेमा के जरिए आईपीएल और फ्रेंचाइजी पर शिकंजा कसा जाएगा। यह भी शक जाहिर किया जा रहा है कि कुछ फ्रेंचाइजी में मॉरिशस से फंडिंग हुई है। इसकी जांच की जा रही है। आयकर विभाग इस बारे में मॉरिशस से सबूत इकट्ठा करने में जुटा हुआ है।

आईपीएल की पहले की आठ फ्रेंचाइजी की बोली भी डॉलर में ही हुई थी। इसके बाद पुणे और कोच्चि फ्रेंचाइजी के लिए भी डॉलर में ही बोली लगाई गई। कोच्चि फ्रेंचाइजी के विवादों में फंसने के बाद प्रवर्तन निदेशालय ने आईपीएल में फेमा के उल्लंघन की जांच कर रहा था। आईपीएल की पहले की आठ फ्रेंचाइजी मुंबई, बंगलुरू, हैदराबाद, चेन्नई, दिल्ली, कोलकाता, मोहाली और जयपुर है। दो नई फ्रेंचाइजी के रूप में पुणे और कोच्चि को शामिल किया गया है।

तेजी से बढ़ी है मोदी की रकम
इनकम टैक्स के रिकाडर्स के अनुसार मोदी की कमाई पिछले कुछ वर्षों में देखते ही देखते बेतहाशा बढ़ी है। 2008-09 के वित्तीय साल में अगर उन्होंने इनकम टैक्स के रूप में 32 लाख रुपये दिये थे तो 31 मार्च 2010 में उन्होंने 11 करोड़ रुपये का टैक्स अदा किया। इसका मतलब ये हुआ कि उनके तमाम कारोबारों की कमाई पिछले वित्तीय वर्ष में बढ़कर 40 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। उनकी कमाई अचानक कैसे इतनी बढ़ गई। क्या आईपीएल से भी इसका कोई संबंध है। इनकम टैक्स अधिकारियों की दिलचस्पी ये जानने में भी है कि अचानक आईपीएल गर्वनिंग काउंसिल के सदस्य मोदी के विरोध में क्यों होते जा रहे हैं।

पूर्णा पटेल
आईपीएल में विवादों के दौरान चर्चा में आने वाली केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल की बेटी पूर्णा पटेल भी हैं। वो आईपीएल की हास्पिलिटी प्रभारी हैं। उन पर इंडियन एयरलाइंस के विमानों के दुरुपयोग का मामला है। प्रफुल्ल पटेल की तीन बेटियों में पूर्णा सबसे छोटी हैं। लेकिन दोनों विवाहित बहनों के विपरीत 24 वर्षीय पूर्णा कई सालों से पिता के राजनीतिक मामलों को मैनेज करने का काम कर रही हैं। मुंबई में स्कूङ्क्षलग और कॉलेज करने के बाद उन्होंने अमेरिका की एक यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में डिग्री ली। पिछले आम चुनाव में उन्होंने पिता के चुनाव अभियान की कमान भी संभाली। क्रिकेट में उनकी दिलचस्पी है। वो एक क्रिकेट का मेगा टूर्नामेंट आयोजित कर चुकी हैं।

सदानंद सुले
सदानंद सुले ताकतवर केंद्रीय मंत्री शरद पवार के दामाद और सांसद सुप्रिया सुले के पति हैं। सुले बहुत धनी परिवार से हैं। उनके बारामती के मालेगांव और देखलावाड़ी में बड़ी जमीनें हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र और सिंगापुर में मकान। मुंबई के पेंढार रोल पर उनका मकान तो खासा बड़ा है, उसकी ही कीमत कई करोड़ में आंकी जाती है। इसके अलावा उनके कई कंपनियों में शेयर हैं। पेशे से वकील सदानंद एक लीगल पोर्टल चलाते हैं और लंबे समय तक विदेश में रहे हैं। एमएसएम में उनकी हिस्सेदारी के बारे में उनकी पत्नी सुप्रिया सुले का कहना है कि सोनी इंटरटेनमेंट चैनल के दस फीसदी शेयर पति को पिता के जरिए हासिल हुए हैं।