राष्ट्रमंडल खेल २०१० : खेल का तेल

बेशक दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों का शहर है लेकिन जरा शहर की ओर नजर तो दौड़ाइए अव्यवस्था, बदहाली और अराजकता का आलम। किसको हो रहा है राष्ट्रमंडल खेलों का फायदा। कम से कम आम जनता को तो बिलकुल नहीं। उसके लिए तो कुछ भी नहीं बदला बल्कि इन खेलों के बोझ तले आखिर में कमर भी उसी की टूटनी है।
कॉमनवेल्थ खेलों के तथाकथित पाखंड पर अनुज अग्रवाल का विश्लेषण

दिल्ली में हो रहे राष्ट्रमंडल खेल मानवाधिकारों, मौलिक अधिकारों, बाल मजदूरी अधिनियम, कानून के शासन, महिलाओं से संबधित कानूनों लोकतंत्र और मर्यादाओं का माखौल उड़ाते हुए घमंडी, दम्भी, सत्ता के नशे में मदमस्त, अभिजातीय मानसिकता से ग्रस्त, लूटखसोट व भ्रष्टाचार से सेन हुए कुछ दंबग लोगों के अंहकार का घटिया प्रदर्शन मात्र बनकर रह गए हैं। दिल्ली में कुछ अतिविकसित द्वीपों जिनकी रचना कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए तैयारी कर रही टीम, दिल्ली सरकार और भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों ने की है, के अतिरिक्त पूरी दिल्ली अव्यवस्था, बदहाली और अराजकता की मिसाल बन गई है। दिल्ली पुलिस का मुख्य काम भी वीआईपी सुरक्षा और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की चौकसी बन गया है। आम जनता से उसका जब भी वास्ता पड़ता है तो वह एक दलाल की भूमिका में ही नजर आती है, एक रक्षक की भूमिका में तो कतई नहीं। दिल्ली के पिछड़े इलाके, स्लम, गाँव आदि विकास की दौड़ में नये विकसित द्वीपों से बहुत पीछे छूट गए हैं। और रोजगार की दौड़ में दिल्ली आये गरीब तबके के मजदूरों और नवशिक्षित निम्न मध्यम वर्ग के युवक युवतियों का अड्डा बन गए हैं। संतुलित व समन्वित विकास के मायने सरकारी विभागों को समझ में नहीं आते। शासन के आदेशों और माननीयों की मनमानियों से निकले प्रोजेक्टों और योजनाओं को जबरदस्ती लागू करना ही उनका काम है और अधिकांशत: इनके अनुपालन में उच्च वर्ग को ही इसका फायदा मिलता है, जनता का सिर्फ इस्तेमाल हो रहा है। दिल्ली में कानून व्यवस्था बड़ी समस्या बन गई है और यातायात जाम उससे भी बड़ी। बाढ़, गर्मी, प्रदूषण गंदगी, स्वाइन फ्लू, डेंगू, संक्रामक रोगों की यहाँ निरन्तर मार रहती हैं और नागरिकों में सिविक सेंस का घोर अभाव है। टै्रफिक नियमों को लागू करने और सिविक सेंस को विकसित करने का कोई प्रयास व्यवस्थित रूप से शहर में किया गया हो इसकी किसी को कोई जानकारी नहीं है।

काश ऐसा होता कि पहले से उपलब्ध खेल ढांचे में आवश्यक सुधार कर खिलाडिय़ों को एक वर्ष पूर्व ही उपलब्ध कर दिया जाता और वे पहले से ही अभ्यास करते। शहर के सारे भागों का समान विकास, नये वाहनों पर रोक, टै्रफिक की व्यवस्थित प्रणाली, जनसहभागिता के साथ सिविक सेंस का विकास और इस विकसित होती भावना का सम्पूर्ण देश में प्रसार किया जाता।
चोरी और लूटमार की खबरें मिलने के बाद भी जब सत्ता के रहनुमा चोरों पर न कोई अकुंश लगाते है और न ही कोई कार्यवाही करते हुए बल्कि उन्हीं लोगों को अगुवा बनाकर राष्ट्र की इज्जत के नाम पर खेलों से जुडऩे की अपील करते हैं तो जनता के मन में वितृष्णा ही जगती है। ऐसे में उसे जब पता है कि उसके दिए टैक्स से राष्ट्रमंडल खेलों के नाम पर 70-80 हजार करोड़ रुपयों का ऐसा खेल हुआ हैं जिसकी वास्तविक लागत आधी से ज्यादा नहीं है तो उसके मन में इन खेलों के प्रति घृणा ही पैदा होती है। खेल आयोजन से जुड़े हर कर्मचारी ठेकेदार और किसी भी प्रकार का काम करने वाले ने अपना पर्याप्त शोषण कराया है या कमीशन दिया है तो वह भावनात्मक रूप से क्यों खेलों से जुड़ेगा। वे सब बिल्कुल मशीन अंदाज में अपनी अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उन्हें पता है कि आयोजन में लगे सभी लोग अपना अपना खेल पहले ही खेल चुके हैं अब जो अगले पंद्रह दिन में होगा वह तो नाटक का पटाक्षेप मात्र है। सबको पता है कि देश में कमीशनखोरों, रिश्वतखोरों और भ्रष्टाचारियों के विरूद्ध व्यवस्था कुछ नहीं करती है। क्या कश्मीरी युवकों की भांति पत्थरबाजी ही बेहतर विकल्प है?

बढ़ते बजट के बीच सरकार ने अनेक प्रकार के नए टैक्स लगा दिए हैं तथा बाजार में भी हर चीज की कीमत बेभाव बढ़ गई है। जिस कारण महंगाई के दुष्चक्र में आम आदमी फसंकर मानसिक संतुलन खोता जा रहा है

गुलामी का प्रतीक
इन खेलों की शुरुआत 1918 में साम्राज्य के उत्सव के रूप में हुई थी। कॉमनवेल्थ खेलों की संरक्षक ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय है। कुछ लोग कॉमनवेल्थ खेलों का इसलिए विरोध करते हैं कि ये अंग्रेजी की गुलामी का विरासत है और इन खेलों में वे ही देश भाग लेते हैं जो ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन रहे हो।
मई 2003 में मेलबर्न में हेमिल्टन (कनाडा) को 22 के मुकाबले 46 वोट से हराने के बाद इन खेलों की मेजबानी दिल्ली को हासिल हुई थी। यद्यपि भारत सरकार ने इन खेलों के लिए सितंबर 2003 में ही जाकर स्वीकृति दी। वजह आईओसी के चेयरमैन सुरेश कलमाडी ने बिना सरकारी इजाजत के इन खेलों के लिए की गई ये घोषणाएं थीं-
* भारत खेल में भाग लेने वाले सभी 71 देशों को एक लाख डॉलर देगा
* 5200 खिलाडिय़ों और 1800 अधिकारियों की यात्रा का खर्च हेतु 48 करोड़ देगा
* कॉमनवेल्थ फेडरेशन के पूरे परिवार को अति सुविधाजनक आवास, कीमती कारें और पर्यटन की सुविधा दी जाएगी
* ब्रिटेन से क्वींस बेटन को लाने का खर्च करीब 11 करोड़ खुद वहन करेगा
* सब मदों में कुल खर्च करीब 150 करोड़

जो दावे किये गये
* इन खेलों से भारत की शक्ति, वैभव, राष्ट्रीय एकता, उसके विकसित होते स्वरूप दुनिया देख सकेगी।
* अंतर्राष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम, विविध खेलों के खिलाडी व प्रशिक्षकों का विकास संभव हो सकेगा।
* देश में ग्रामीण, कस्बे व शहरी स्तर पर खेलों का विकास संभव हो सकेगा व इनके माध्यम से शारीरिक सुदृढता व खेल भावना आदि का विकास हो सकेगा
* देश की राजधानी दिल्ली दुनिया के विकसित शहरों की सूची में आ जाएगी
* देश में खेलों से संबंधित विभिन्न प्रकार के रोजगारों का विकास होगा
* देश में विदेशी पर्यटकों के आने से विदेशी मुद्रा का आगमन होगा
* देश के विकसित होते इंफ्रास्ट्रक्चर से प्रभावित होकर विदेशी निवेश की मात्रा बढेगी

लेकिन हाल बेहाल
* खेलों के दौरान पुलिस द्वारा की जाने वाली सख्ती के कारण दिल्ली के बाजार, ऑफिस व उद्योग-धंधे व शिक्षण संस्थान 15 दिन या तो नहीं खुलेंगे या सीमित मात्रा में खुलेंगे। जिससे अरबों रुपए का नुकसान की संभावना है
* निर्माण कार्यों के दौरान बाल मजदूरी, कम दरों पर मजूदरों से काम लेने, अधिक घंटे काम कराने, मजूदरों को पर्याप्त सुरक्षा न देने, 50 से अधिक मजूदरों के मरने, बाल शोषण, महिला शोषण व मानवधिकार हनन जैसी सैकड़ों शिकायतें है। इससे सरकार किस प्रकार की अंतर्राष्ट्रीय छवि बनाना चाहती हैं वहीं जानें।
* खेलों के कारण कई लाख लोगों को उनकी बस्ती से उजाड़ा गया। हजारों खोमचे वालों, छोटे दुकानदारों, रेहड़ी वालों, भिखरियों, मजदूरों और रिक्शा ठेले वालों आदि को दिल्ली से खदेड़ा गया
* चलने वाले निर्माण कार्यां से लोगों को अपने गंतव्य स्थल पर पहुंचने में कई गुना समय लगा जिसके कारण पेट्रोल, डीजल की कई गुना हानि हुई। निर्माण कार्यों के कारण उड़ती धूल मिट्टी से पर्यावरण व लोगों के स्वास्थ्य पर लगातार नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है
बढ़ते बजट के बीच सरकार ने अनेक प्रकार के नए टैक्स लगा दिए हैं तथा बाजार में भी हर चीज की कीमत बेभाव बढ़ गई है। जिस कारण महंगाई के दुष्चक्र में आम आदमी फसंकर मानसिक संतुलन खोता जा रहा है।

सोनिया-राहुल की चुप्पी क्यों!
जिस प्रकार कॉमनवेल्थ गेम्स से जुड़े हर प्रोजेक्ट में व्यापक भ्रष्टाचार की रिपोर्टें मीडिया में आई और पता चला कि लगभग हर ठेका आयोजन समिति से जुड़े लोगों के रिश्तेदारों व जानने वालों तथा वरिष्ठ राजनीतिज्ञों व नौकरशाहों से जुड़े लोगों को ही दिया गया है और सौ से लेकर पांच सौ प्रतिशत तक कमीशन दिया गया है या मूल लागत से कई गुना तक बिलों के भुगतान हुए है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और महासचिव राहुल गांधी की रहस्यमयी चुप्पी समझ से बाहर है। देश की नाक, इज्जत और अंतर्राष्ट्रीय छवि बनाने के सपने टूट चुके हैं और देश में हर अच्छे काम का श्रेय लेने को आतुर ये दोनों शख्स क्यों हाथ बांध और मुंह सिलकर तमाशा देख रहे हैं। क्या यह कलमाड़ी शीला, जयपाल रेड्डी और गिल की चौकड़ी की कारगुजारियों को मौन स्वीकृति है?
राष्ट्रमंडल खेलों का एक बड़ा सच यह भी है कि सारे देशों की टीमें तो भाग ले रही है किंतु प्रमुख खिलाड़ी नदारद है।
असुरक्षा व बदइंतजामी की खबरों के बीच सरकार की कूटनीतिक कोशिशों के
बीच टीमें तो आ रही हैं मगर दोयम खिलाडिय़ों के साथ।

गलत समय पर निर्माण
बरसात के समय किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य नहीं किए जाते हैं। प्रोजेक्टों में देरी के कारण मजबूरी में पूरी दिल्ली में लगभग सभी प्रोजेक्टों पर निर्माण कार्य लगातार चल रहा है। इनमें से अधिकांश के कमजोर रहने की आशंका है। इसमें से कुछ उखडऩे भी लगा है। अंतत : इस समय किए गए ये सारे कार्य पुन: कराने पड़ेंगे। इससे अरबों रुपयों का नुकसान होने की आशंका है

कहां-कहां हुए घोटाले
* क्वींस बेटन को लाने में : फर्जी फर्मों को भुगतान, अनावश्यक खर्चें
* दिल्ली सरकार द्वारा अनुसूचित जाति के विकास के लिए पिछले तीन सालों में आवंटित 685 करोड रुपये कॉमनवेल्थ खेलों के लिए खर्च कानूनन यह अपराध है
* 26 जनवरी की परेड में कॉमनवेल्थ की झांकी पर एक करोड़ रुपये खर्च जबकि अन्य राज्यों का औसतन खर्च दस से पंद्रह लाख
* फिनिशिंग में 687 करोड़ रुपये खर्च
* सौंदर्यीकरण, स्ट्रीट स्केपिंग में 272 करोड़ रुपये का खर्च
* 23 करोड़ रुपये की लागत से दस लाख पौधे लगाए जाएंगे।
* द्घाटन व समापन समारोह के लिए सौ करोड़ रुपये की लागत से एयरोस्टेट (गुब्बारा)
* स्पैन कंपनी को 213 करोड़ रुपये भुगतान की शर्त पर स्पांसरशिप ढूढने के लिए अधिकृत किया गया जबकि अधिकांश धन 448 करोड़ रुपए कारपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी, मद से, सार्वजनिक उपकरणों द्वारा दिया जा रहा है
* अस्थाई निर्माणों के लिए अनुभवहीन कंपनी को 670 करोड़ रुपये का ठेका इस कंपनी ने सामान्यत: पांच से पंद्रह गुनी लागत पर सामान की खरीदारी की।

तीन सौ से अधिक ऐसे लोगों को नियुक्ति दी गई जो सुरेश कलमाड़ी से सीधी तौर पर जुड़े थे।
* बहुत अधिक संख्या में सलाहकारों की नियुक्ति की गई जो अनावश्यक थी
* एचसीएल, मोटोरोला को दिए गए कम्युनिकेशन सिस्टम की नीलामी 230 करोड़ में दी गई जिसकी वास्तविक लागत 98 करोड़ थी
* उद्घाटन व समापन समारोह में करीब सौ करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे
* कॉमनवेल्थ गेम्स समिति ने सभी भर्तियों में भारी अनियमितताएं कीं। भर्ती, स्थाईकरण, वेतननिर्धारण व प्रमोशन में घपले किए गए व शारीरिक शोषण तक किया गया
* खेल मुख्यालय में वैश्याओं व कॉलगर्ल की उच्च अधिकारियों को सप्लाई किए जाने के भी आरोप
* लगभग प्रत्येक ठेके में पचास से दो सौ प्रतिशत तक कमीशन लेने के आरोप है
* आरोप है कि सारे उच्च अधिकारियों के ऑफिस को शानदार सजाया गया जो उसका उपयोग शराब पीने, बढिय़ा खाने और लड़कियों के साथ रंगरेलियां मनाने के लिए करते थे
* पंद्रह दिनों की किचन संचालन के लिए 26 करोड़ रुपये के उपकरण खरीदे गए
* 165 करोड़ रुपये में 93 लाख गमले व पौधे खरीदे गए। आश्चर्यजनक रूप से कुछ गमलों की कीमत 2700 रुपये प्रति गमला है। दुखद ये है कि दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा कारणों से इन गमलों को लगवाने से मना कर दिया
* उद्घाटन समारोह के बाद मैदान की खराब हुई घास को एक रात में दोबारा लगाने के लिए एक कंपनी को सात करोड़ रुपये का ठेका दिया गया है

स्टार एथलीट जो नहीं आ रहे
कामनवेल्थ गेम्स में कई स्टार एथलीट नहीं होंगे। किसी न किसी कारण उन्होंने इस प्रतियोगिता से नाम वापस ले लिया है इनमें कुछ एथलीटों के नाम इस तरह हैं
* उसैन बोल्ट (जमैका) - 100 मीटर और 200 मीटर दौड़ के वर्ल्ड रेकार्डधारी
* असाफा पावेल (जमैका) - कामनवेल्स गेम्स के 100 मी. दौड़ के विजेता
* पाउला रेडक्लिफ (इंग्लैंड) - मैराथन वल्र्ड रेकार्ड होल्डर
* क्रिस्टीन ओरुगु (इंग्लैंड) - ओलंपिक 400 मीटर गोल्ड मेडलिस्ट
* जेसिका एनिस (इंग्लैंड) - वर्ल्ड और यूरोपीय हेप्टाथलन चैंपियन
* फिलिप्स इदोऊ ( इंग्लैंड) वर्ल्ड ट्रिपल जंप चैंपियन
* दानी सैमुअल्स (आस्ट्रेलिया) - वर्ल्ड डिस्कस चैंपियन
* डेविड रुदिसा (केन्या) 800 मीटर वर्ल्ड रेकार्ड होल्डर
* असबेल किपरोप (केन्या) ओलंपिक 1500 मीटर चैंपियन
* लिनेट मैसाई (केन्या) वर्ल्ड 10,000 मीटर चैंपियन
* क्रिस होये (स्कॉटलैंड) मल्टीपिल वर्ल्ड और ओलंपिक साइक्लिंग चैंपियन
* विक्टोरिया पेंडलेटन (इंग्लैंड) - वर्ल्ड और ओलंपिक साइक्लिंग चैंपियन
* स्टीफनी राइस (आस्ट्रेलिया) - ट्रिपल ओलंपिक गोल्ड मेडल तैराक
* एंडी मरे (स्काटलैंड) - टेनिस प्लेयर
* लेटन ह्यूइट (आस्ट्रेलिया) - टेनिस
* सामंथा स्टोसर (आस्ट्रेलिया) - टेनिस

सीवीसी की रिपोर्ट के अनुसार
* निर्माण कार्यों की कंक्रीट की ताकत जांचने के बाद बढ़ा-चढ़ा कर बताई गई
* अनुभवहीन फर्म को ट्रेनिंग की विशेष सुविधाओं के निर्माण का काम दिया गया
* बिजली के किसी भी इंस्टालेशन को नहीं जांचा गया
* हरके जांच में बिल्डिंग मैटीरियल में सीमेंट की भारी कमी पाई गई
* थर्ड पार्टी क्वालिटी एश्योरेंस ने गलत कामों पर चुप्पी साधी
* स्टील को रस्ट से बचाने वाला पेंट पूरी तरह खराब और नाकामयाब
* ठेकों की रकम बढ़ा-चढ़ाकर दी गई और इनका कारण शीघ्र काम करने की आवश्यकता बताई गई
* 15 प्रोजेक्टों को अत्यधिक ऊंचा रेट दिया गया
* 30 काम जो टेंडर में नहीं थे उन्हें मनमाने तरीके से शामिल किया गया
* चार आस्ट्रेलियाई कंपनियों को अत्यंत फायदा दिया गया
* सड़क एवं पटरी की बिना जरूरत खुदाई और निर्माण शुरू किया गया
* खेल गांव के निर्माण के लिए अधिकृत एम्मार-एमजीएफ कंपनी ने अनेक सरकारी एजेंसियों द्वारा अनियमितताओं की जांच के दायरे में है तथा इसको निर्माण कार्य का कोई अनुभव नहीं था
* इस ग्रुप के खिलाफ 350 से अधिक कंपनियो फ्लोट करने, बड़े पैमाने पर देश के पैसे को बाहर भेजने और फिर दूसरे रूटों से वापस लाने के आरोप है। इस ग्रुप ने गैर कानूनी रूप से एफडीआई के पैसों से कृषि भूमि खरीदी। आरोपों के बाद भी डीडीए ने न केवल इस कंपनी को मोटा लोन दिलाया बल्कि दिल्ली सरकार ने भी 700 करोड़ रुपये का बेलआउट पैकेज दिया। आरोप है कि झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कौड़ा ने भी इस कंपनी में पैसा लगाया हुआ है
* टीसीएस,विप्रो आदि कंपनियों ने भी टेक्नोलॉजी सप्लाई आदि के संबंध में सरकार से गंभीर शिकायतें की है
* कुल 60,000 टिकटों में से मात्र 24,000 टिकटों को बेचा जा रहा है। बाकी वीआईपी अधिकारियों, स्पांसर्स और टीमों आदि के लिए रखा गया है। कुछ टिकटों को छोड़कर अधिकांश इतनी महंगी है कि आम आदमी की पहुंच से बाहर है।
* 34 ऐसे विदेशी परामर्शदाताओं को रखा गया है जिनको प्रतिदिन पचास हजार से एक लाख रुपये तक का भुगतान किया जा रहा है

कौन-कौन लूट में शामिल
कॉमनवेल्थ गेम्स आयोजन समिति के सभी बड़े अधिकारी, खेल मंत्रालय, पर्यटन मंत्रालय, दिल्ली सरकार, सीपीडब्ल्यूडी, डीडीए, एमसीडी, राइट्स आदि के परियोजनाओं से जु्रड़े अधिकांश मंत्री, अधिकारी व कर्मचारी

अब क्या होना चाहिए
* समस्त घोटालों की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति बननी चाहिए
* प्रथम दृष्टया आरोपी पाए गए सभी अधिकारियों पर तुरंत कानूनी कार्यवाही की जानी चाहिए
* सभी आरोपित लोगों को अपने पदों से हटा देना चाहिए
* सभी खेल संघों का पुनर्गठन किया जाना चाहिए व इनमें भूतपूर्व खिलाडिय़ो को प्राथमिकता देनी चाहिए
* भारतीय ओलंपिक संघ, खेल मंत्रालय व अन्य सभी संगठनों की कार्यप्रणाली, नीति व उद्देश्यों की पुर्नस्थापना हेतु अनुभवी लोगों की समिति बनाई जानी चाहिए
* सभी अनियमिताओ में संलग्न सभी ठेकेदारों, एजेंसियेों आदि से किए गए घोटाले की रकम वापस लेने की कार्यवाही की जानी चाहिए तथा उनके द्वारा किए गए घटिया काम उन्हीं के खर्चे पर पुन: गुणवत्तापूर्ण तरीके से किए जाने चाहिए
* सभी स्टेडियमों व खेल से संबंधित ढांचों को अधिकतम उपयोग के लिए तथा देश के प्रत्येक भाग के नागरिक के उपयोग के लिए वृहद नीति बनानी चाहिए
* जितना कुल खर्च दिल्ली के लिए किया गया है उसी अनुपात में देश के प्रत्येक जिले में खेलों के विकास के लिए धन आवंटन हो
* विकसित हुए खेल ढ़ांचे के उपयोग के लिए अधिक से अधिक अंतर्राष्टï्रीय खेल प्रतिस्पद्घाएं की जानी चाहिए
* ठेकेदारों की किए गए काम के लिए पांच साल तक की गारंटी ली जानी चाहिए
* किसी भी प्रकार के विशेषाधिकर, नि:शुल्क टिकट आदि की व्यवस्था खत्म की
जानी चाहिए --

 

बजट इतना कैसे बढ़ गया?

मात्रा 12 दिन के; 3 अक्टूबर से 14 अक्टूबर तक होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स के इस आयोजन पर कुल खर्च का अनुमान लगाना आसान नहीं है क्योंकि भारत सरकार के कई मंत्रालय, विभाग एवं एजेंसियां कामों में लगी हुई हैं। जैसे : 1- दिल्ली सरकार, 2 डीडीए, 3 पीडब्ल्यूडी 4 भारतीय खेल प्राधिकरण, 5 केन्द्र सरकार, 6 खेल मंत्रालय, 7 बिजली, पानी इत्यादि विभाग। पर्यटन मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार अब तक हुए 18 कॉमनवेल्थ गेम्स में सबसे ज्यादा महंगा कॉमनवेल्थ गेम्स दिल्ली 2010 है, जिसमें 87,000 करोड़ रुपया खर्च किया जा रहा है।


S. No. Expenditures Estimate Rupees (In Crores)
1. As per IOA estimated expenditure on the Games 2003 399.05
(This did not include the cost of construction of Games
Village and other).
2. At the time of bides for the Commonwealth Games 1899.00
2003 the estimated cost for the hosting the event.
3. The estimated budget for the Games approved by the 3566.00
Cabinet in April, 2007.
4. By a reply in Parliament on 16 July, 2009 the estimate given was 9865.00
5. (i) As per estimate of Ministry of Youth Affairs & Sports 11494.00 28054.00
(ii) As per estimate of Govt. of Delhi 16560.00
6. As per Tourism Ministry Report 87000.00

जिस समय भारत ने खेलों के लिए दावा पेश किया था उस समय की लागत

Budget Item US $ Million Rupees
Construction of new stadiums 20.94 94.23 crore
Upgradation of exisiting stadiums 8.69 39.10 crore
Major repairs and Maintenance 23.23 105.00 crore
Total Estimate 52.86 238.00 crore

स्टेडियमों पर अब खर्चा जो कि ऊपर दिखाए खर्चों से 2160 प्रतिशत बढ़ गया है

Stadiums/Training Centres Actual Cost
Thyagaraj Sports Complex (Athletics, Netball) Rs. 300.00 Crore
Talkatora Stadium (Boxing) Rs. 150.00 Crore
Archery Venue at the Yamuna Sports Complex Rs. 25.00 Crore
Chhhatrasal Stadium Rs. 55.10 Crore
Ludlow Castle Wrestling Training Centre Rs. 13.00 Crore
Jawaharlal Nehru Stadium (Opening & Closing Ceremonies, Rs. 961.00 Crore
Athletics, Lawn Bowls and Weightlifting
Karni Singh Shooting Range Rs. 149.00 Crore
Dr. Shyama Prasad Mukherjee Swimming Pool Complex (Aquatics) Rs. 377.00 Crore
Indira Gandhi Stadium (Gymnastics, Cycling and Wrestling) Rs. 669.00 Crore
Indira Gandhi Indor Stadium Rs. 240.00 Crore
Major Dhyanchand National Stadium Rs. 262.00 Crore
Training Value at Jamia Millia Islamia University
(Rugby and Table Tennis) Rs. 43.00 Crore
Delhi University (Rugby, Netball and Training for Boxing) Rs. 50.00 Crore
Siri Fort Sports Complex (Badminton and Squash) -
Saket Sports Complex -
R. K. Khanna Tennis Complex (Tennis) Rs. 65.35 Crore
Yamuna Sports Complex (Table Tennis & Archery Preliminaries) -
Delhi Public School, R. K. Puram (Training venue for Lawn Bowls) Rs. 1.73 Crore
Kadarpur Shooting Range, Gurgaon Rs. 28.26 Crore
Total Rs. 3389.44 Crore

नोट : उपरोक्त राशि में इन स्टेडियमों के लिए सलाहकार को पफीस के रूप में दिए गये 42 करोड़ रुपये शामिल नहीं हैं। यह राशि बढ़कर अब 3431-44 करोड़ रुपये हो गई है।

Approximate Cost of the Project of Govt. of Delhi Related with CWG 2010
S. No. Name of Project Cost (in Crores)
1. Flyovers & Bridges 3700.00
2. ROB/RUB & IGI Terminal work 450.00
3. Stadia 670.00
4. HCBS (Ambedekar Nagar to Delhi Gate) 215.00
5. Augmentation of DTC Fleet 1800.00
6. Construction of Bus Depot 900.00
7. Widening, Strengthening & Resurfacing of Roads 650.00
8. Street Lightning 650.00
9. Street Scaping 525.00
10. Improvement Road Signages 150.00
11. Metro Connectivity 3000.00
12. Power Plants 2800.00
13. Water Supply (STP, WTP, Munak Canal etc.) 400.00
14. Health 50.00
15. Parking Facilities covering Nallahs 400.00
16. Communication & IT 200.00
Total 16560.00

Approximate Cost of the Projects of Ministry of Youth Affairs and Sports
S. To For Amount (Rs.)
No. (In Crores)
Ministry of Youth Affairs and Sport (MoYAS)
1. Sports Authority of India (SAI) Sports Infrastracture for 5 major 2460.00 stadia complex
2. Sports Authority of India (SAI) Sports Fitness Equipment & Furnishings 14.35
for Stadia
3. Delhi University (DU), Jamia Millia Islamia Sports Infrastracure 65.65
(JMI) & Delhi Public School
4. All India Tennis Association Tennis Venue 350.71
(AITA)
5. Central Public Works Big Bore Shooting Range at CRPF Centre, 28.50
Department (CPWD) Kadarpur Haryana
6. Ministr of Youth Affairs & Re-creation of Sports Facilities in NCR 15.00
Sports (MoYAS)
Sub Total (Sports Infrastracture - MoYAS) 2934.21
7. Ministry of Youth Affairs & Preparations of Teams for CWG - 2010 678.00
Sports (MoYAS)/ Sports
Authority of India (SAI)
8. Opening Committee Conduct of the Games
9. Organizing Committee Overlays 1620.00
10. Organizing Committee Timing Scoring Result (TSR) & 687.00
Games Time Sports Equipment 87.25
11. Mahanagar Telephone Telecom Infrastracture 182.00
Nigam Ltd. (MTNL)
Sub Total (MoYAS) 3254.25
Total (MoYAS) 6188.46
Ministry of Urban Development (MoUD)
12. Delhi Development and Sports Infrastracture 827.85
Broadcasting (I&B)
Total (MoYAS) 827.25
13. Parsar Bharti, Press Inforamtion Host Broadcasting International Broadcasting 482.57
Bureau (PIB and India Trade Centre and Main Press Centre
Promotion Organization (ITPO)
14. Electronics Corp of India Ltd. Security and Surveillance Equipments for 375.00
(ECIL) Stadia & Venue
15. Delhi Police Additional Posts, Security Equipments & 172.00
Vehicles etc.
16. Ministry of Home Affairs Intelligent Traffic Management System 200.00
(MoHA)
Total (MoHA) 747.00
17. Ministry of Health and Family Sports, Medicine and Injury Centre, 70.72
Welfare (MoHFW) safdarjung Hospital
Total (MoHFW) 7072.00
Ministy of Culture
Govt. of Delhi
18. Archeological Survey of India (ASI) Refurbishment of Monuments 25.75
19. Govt. of India 2800.00
20. Govt. of Maharashtra and 351.48
Civic Agencies of Pune
Grand Total 11494.00

वही हुआ जिसका डर था

रत्ना
आखिर वही हुआ जिसका डर था। कामनवेल्थ गेम्स से ऐन पहले तक भी सफाई और व्यवस्थाओं को लेकर काम जारी है। कई जगह निर्माण कार्य और फिनिशिंग के काम भी जारी हैं। दुर्भाग्यपूर्ण ये भी हुआ कि सदस्य देशों ने खेलों के ऐन पहले न केवल व्यवस्थाओं और बदइंतजामी पर सवाल उठाते हुए न आने की धमकी दे डाली बल्कि यहां तक कह दिया कि भारत तो इन खेलों के आयोजन के लायक था ही नहीं। दरअसल खेल गांव के फ्लैट्स में सफाई का आलम वाकई बहुत बदतर स्थिति में था। गद्दों पर कुत्तों के निशान थे। टायलेट्स बुरी तरह गंदे पड़े हुए थे। हाइजीन के हिसाब से इसे इसलिए और बर्दाश्त नहीं किया जा सकता,क्योंकि ये एक बड़े इंटरनेशनल खेलों का आयोजन है और काफी ढेर सारे देश हिस्सा ले रहे हैं। साथ ही साथ सितंबर के आखिरी सप्ताह में आलम ये भी रहा कि इसके खेल गांव के टावर गंदे थे, जगह जगह पानी का जमाव और अव्यवस्थाएं अलग। इससे पहले जामा मस्जिद में दो सिरफिरे आतंकवादियों ने दो विदेशियों को निशाना बनाते हुए उन पर गोलियां चलाकर सुरक्षा पर बड़ा सवाल खडा कर दिया। केवल इतना तक होता तो गनीमत थी, सितंबर के दूसरे पखवाड़े में यानि गेम्स के ठीक पहले जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम के पास बन रहा फुटओवर ब्रिज देखते ही देखते भरभरा कर गिर पड़ा। कई देशों ने इन सब बातों को मुद्दा बनाकर नहीं आने की चेतावनी दे डाली।

बेशक बात बात में खेलों से हटने की धमकी देना और खेलों के तमाम पहलुओं पर लगातार सवाल उठाना भारत जैसे ताकतवर बनते देश को लेकर इनका पूर्वाग्रह भी कहा जाना चाहिए। दिनों दिन ताकतवर होते जा रहे भारत की स्थिति अब उनमें खीझ और कुंठा भी पैदा करती है। अन्यथा विरोध के तमाम और तरीके हो सकते थे। बात- बात में खेलों के बायकाट की धमकी देना हास्यास्पद और बचकानापन ही है। लेकिन ऐसी स्थिति इसलिए आई क्योंकि हममें खुद कमियां थीं, आयोजकों ने इस बात की गंभीरता को समझा ही नहीं कि ये केवल कामनवेल्थ गेम्स का आयोजन नहीं, बल्कि देश की प्रतिष्ठा का सवाल भी है। सबसे बड़ी बात ये भी कि भारत इन खेलों के माध्यम से पूरी दुनिया को ये दिखाना चाहता है कि वह बदल रहा है, ताकतवर हो रहा है, समृद्ध हो रहा है और बदलती हुई दुनिया में नई धुरी के रूप में उभर रहा है। लेकिन आयोजकों की बदइंतजामियों, भ्रष्टाचार और लापरवाही भरे रवैये ने देश का सिर शर्म से झुका दिया। पूरी दुनिया के मीडिया को इससे अच्छा मौका और क्या मिलता। उसने भारत की इमेज को खराब करने वाली मुहिम ही छेड़ दी। जाहिर सी बात है कि इससे एक मजबूत ब्रांड के रूप में उभर रहे इस देश की साख तो प्रभावित हुई ही है।

हालांकि बड़े खेल आयोजनों में इस तरह की गड़बडिय़ां या लेटलतीफी पहली बार भारत में ही नहींहुई बल्कि एथेंस और बीजिंग ओलंपिक खेलों के दौरान भी इसी तरह की खबरें आती रही थीं। एथेंस ओलंपिक से एक हफ्ते तक वहां आयोजन पक्के नहीं थे बल्कि यहां तक कहा जाने लगा था कि ये खेल कहीं और कराये जा सकते हैं। बीजिंग ओलंपिक खेलों में सुरक्षा को लेकर तमाम सवाल उठाये गये, लेकिन जब ये खेल हुए तो पूरी दुनिया ने इन्हें बेहतरीन तरीके से होते देखा, सारे सवाल धरे के धरे रह गये। कुछ ही महीनों पहले दक्षिण अफ्रीका में हुए वल्र्ड कप फुटबाल में भी यही आलम था, वहां तो आखिरी घंटों तक आयोजन से जुड़ी तैयारियां चलती रहीं, लेकिन दक्षिण अफ्रीका ने अपने आयोजन से सबको चुप कर दिया।

लेकिन हम अगर आज इस स्थिति में हैं तो हमें खुद को आइने में देखने की जरूरत है। भारत को ये खेल सात साल पहले मिले थे। सही तरीके से काम डेढ़ दो साल पहले शुरू हुआ। जिस तरीके से काम किया गया, उसमें जाहिर था कि आयोजन से जुड़े लोगों की न तो मंशा ठीक थी और न ही उनमें बेहतर तालमेल। भ्रष्टाचार तो इतना जबरदस्त हुआ कि हर कोई आहत है। बजट से इतना ज्यादा पैसा खर्च हो चुका है कि आने वाले सालों में दिल्ली वाले उसकी कीमत बढ़े हुए टैक्स से चुकाएंगे। इसका तो कोई हिसाब ही नहीं है कि खेल के नाम कितने लोगों ने कितना घर भरा और किस कदर जनता के पैसे पर गुलछर्रे उड़ाये। खेल से जुड़े तमाम कांट्रैक्ट्स अंतिम समय तक इसलिए टाल कर रखे गये क्योंकि उन्हें मनमाने तरीके से अपने लोगों को देना था।

इस खेल से हमें कई सबक सीखने चाहिए, कभी भी आयोजन समिति पर सारा काम सौंपकर आंख नहीं मूंद लेनी चाहिए। बल्कि शुरू से एक नियंत्रण सेल का गठन करना चाहिए, जो न विशेषज्ञ लोगों से युक्त हो बल्कि वित्त पर भी जिसका नियंत्रण हो, ये लोग सक्षम अधिकारों और गतिशीलता वाले हों। खेलों के लिए बदनामी के पीछे केवल कलमाड़ी का सिर काटने के बजाये प्रधानमंत्री, खेल मंत्री और दिल्ली की मुख्यमंत्री को भी कठघरे में खड़ा किया जाना चाहिए। जो सक्रियता उन्होंने बाद के हफ्तों में दिखाई, वो पहले क्यों नहीं दिखाई। हमारे खेलों की तैयारी सही मायनों में मार्च 2010 तक पूरी हो जानी चाहिए थीं। चीन से उदाहरण लेना चाहिए,जहां गुआंगझांग में एशियाई खेल नवंबर में होने थे, उन्हें ये मेजबानी 2006 में मिली थी और चार साल से भी कम समय में उनका सब कुछ तैयार हो चुका है और एशियाई खेलों से जुड़े पूरे ढांचे को आयोजन समिति को सौंपा जा चुका है। उनके एथलीट तैयार हुए स्टेडियमों में अभ्यास में जुट गये हैं।

पर्दें के पीछे के राजनय ने भले ही कामनवेल्थ गेम्स पर से संकट के बादल छांट दिये हों लेकिन चुनौतियां काफी हैं। हमें बेहतर आयोजन करके दुनिया को दिखाना चाहिए कि हम वाकई समर्थ और सक्षम हैं। भारत को अगर वाकई दुनिया के ताकतवर और विकसित देशों की अग्रिम कतार में शामिल होना है तो देश के कर्ताधर्ताओं को कैजुअल एप्रोच और भ्रष्टाचार को जड़ से निकाल फेंकना होगा।