
Posted Mon, 02/13/2012 - 20:43 by admin
11 Feb 2012: दिल्ली के कुछ ऐसे भिखारियों के बारे में तो हमने पहले से सुन रखा
है, जिनके मरने पर उनके सिरहाने से हजारों रूपए बरामद होते हैं लेकिन आपने क्या किसी
ऐसे भिखारी के बारे में भी सुना है, जो बाकायदा करोड़पति है, प्रतिष्ठित है और जिसके
घर में कई नौकर-चाकर भी हैं| वह आलीशान बंगलों में रहता है| उसकी बेटी मुंबई में
सॉफ्टवेयर इंजीनियर है और बेटा लंदन में पढ़ाई कर रहा है| इन सज्जन का नाम है,
मुकुंद गांधी और ये रोज़ 3 घंटे अहमदाबाद के जमालपुर मार्केट में खड़े होकर भीख
मांगते हैं| कहते हैं कि जब से मुकुंदजी की पत्नी को देहांत हुआ है, उन्हें एकांत
बर्दाश्त नहीं होता| वे अपनी उदासी छांटने के लिए रोज बाजार में जा बैठते हैं|
क्या उदासी मिटाने का यही एक मात्र् तरीका है? तरीके तो हजार हैं लेकिन मुकुंदजी को
सिर्फ यही तरीका क्यों सूझा? इसी तरीके से उन्हें संतोष क्यों मिलता है? इस
दार्शनिक प्रश्न का उत्तर तो शायद स्वयं मुकुंदजी भी न दे सकें?
लेकिन इस प्रश्न का उत्तर मुझे एक अत्यंत प्रसिद्घ मंदिर के पुजारी ने दिया| यह
प्रश्न मुकुंद गांधी के बारे में नहीं था| मुकुंद गांधी की खबर तो अभी मालूम पड़ी
है लेकिन पुजारीजी से यही प्रश्न साल भर पहले किसी अन्य संदर्भ में पूछा गया था|
उनके उस मंदिर पर भिखमंगों की जैसी जबर्दस्त भीड़ मैंने देखी, शायद उसके पहले किसी
अन्य मंदिर पर नहीं देखी| जितने भक्त, उतने ही भिखारी! भिखारी भी ऐसे कि आप पर झपट
पड़ें| आप उन्हें भीख में कुछ रूपए न दें तो वे आपके कपड़े फाड़ दें| पुजारी ने
मुझसे कहा कि आप इनसे नाराज बिल्कुल मत होइए| हमारे मंदिर के ये भिखारी देश के बड़े
जाने-माने लोग हैं| ये आपकी ही जात-बिरादरी के लोग हैं| मैंने उनसे कहा, यह आप क्या
बोल रहे हैं? उन्होंने कहा, मैं आपको इनका रहस्य बताता हूं|
पुजारीजी ने बताया कि इनमें से नंगा-भूखा कोई नहीं है| ये सब जन्मजात करोड़पति हैं|
पिछले जन्म में इनकी हसरत पूरी नहीं हो पाई| ये सब करोड़पति से अरबपति बनना चाहते
थे| दिन-रात हाय-पैसा, हाय-पैसा का जाप करते रहते थे| हाय-पैसा, हाय-पैसा करते-करते
ही ये सब नरक पहुंच गए| इनकी अधूरी कामना पूरी तरह से पूरी हो जाए, इसीलिए भगवान ने
इन्हें भिखारी बनाकर मंदिर के द्वार पर बिठा दिया है| अब ये सुबह से शाम तक बस उसी
एक मंत्र् का जाप करते रहते हैं| हाय-पैसा, हाय-पैसा| लाओ-पैसा, लाओ-पैसा!
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