
Posted Wed, 02/01/2012 - 23:02 by admin
प्रकृति से अप्रतिम सौंदर्य प्राप्त गोवा खनिज पदार्थों की लूट का बड़ा अड्डा बन
गया है और यही यहां की चुनावी राजनीति का प्रमुख मुद्दा भी है। क्या गोवा में सत्ता
परिवर्तन की सुगबुगाहट है? एक विश्लेषण।
राजनीतिक लिहाज से गोवा और उत्तर प्रदेश दो बेहद अलग-अलग धु्रव हैं। पर इस बार के
चुनाव में दोनों राज्यों में एक घटना ऐसी हुई जो दोनों ही राज्यों में चुनावी मुद्दा
बन गई। उत्तर प्रदेश में भाजपा ने बसपा से निकाले गए भ्रष्टाचार के आरोपी बाबू सिंह
कुशवाहा को पार्टी में शामिल करके अपनी किरकिरी कराई और गोवा में यही काम वहां की
सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस ने अवैध खनन में संलिप्तता के आरोपी जितेंद्र देशप्रभु
को पार्टी में शामिल करके किया। गोवा पुलिस की अपराध शाखा द्वारा जेल में डाले गए
देशप्रभु को कांग्रेस नेे पोरवोरिम सेे टिकट दिया है। हालांकि, गोवा में चुनाव तीन
मार्च को होने हैं लेकिन विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने वाले इस राज्य का सियासी
पारा अभी से चढ़ने लगा है।
यही वजह है कि देशप्रभु को कांग्रेस में शामिल किए जाने के बाद दिगंबर कामत की
अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार पर मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा ने हमले तेज कर दिए हैं।
राज्य में अवैध खनन एक बड़ा चुनावी मुुद्दा बनता जा रहा है। विपक्ष लगातार अपने
प्रचार अभियानों में यह आरोप लगा रहा है कि दिगंबर कामत सरकार के कई मंत्री अवैध
खनन में शामिल रहे हैं और ऐसी भ्रष्ट सरकार को सत्ता में बने रहने का कोई अधिकार नहीं
है। विपक्षी दल देशप्रभु को कांग्रेस में शामिल किए जाने को वहां के लोगों के बीच
इस तरह से पेश कर रहे हैं जैसे कांग्रेस ने अपने पाप ढंकने के लिए यह काम किया हो।
देशप्रभु कांग्रेस में आने से पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय सचिव
थे। कोरगाव गांव से लौह अयस्क के अवैध खनन के मामले में उन पर १.७२ करोड़ रुपये का
जुर्माना लगाया जा चुका है। देशप्रभु कांग्रेस में आने से पहले पेरनेम विधानसभा
क्षेत्र से विधायक भी रहे हैं।
भाजपा इस राज्य में न सिर्फ अवैध खनन का मसला उठा रही है बल्कि ईसाईयों को लुभाने
के लिए भी भरसक कोशिशें कर रही है। गोवा की कुल आबादी में ईसाईयों की संख्या तकरीबन
३० फीसदी है। भाजपा यह कहते हुए इस धर्म के लोगों का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर
रही है कि उसने काफी संख्या में ईसाईयों को टिकट दिया है और वादा किया है कि अगर
राज्य में उसकी सरकार बनी तो सरकारी नौकरियों में भी ऐसी ही व्यवस्था की जाएगी।
राज्य की सत्ता में भाजपा को वापस लाने के लिए प्रचार अभियान की कमान राज्य के
भूतपूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पारिकर ने संभाल रखी है। पारिकर लोगों को यह भी बता रहे
हैं कि कांग्रेस की मौजूदा सरकार के राज में अल्पसंख्यकों को सरकारी नौकरियों में
सिर्फ ८.६ फीसदी हिस्सेदारी मिली है।
इसके अलावा भाजपा यहां की सत्ता से कांग्रेस को बेदखल करने के लिए भाई-भतीजावाद का
मुद्दा भी उठा रही है। भाजपा का यह आरोप है कि कांग्रेस के जरिए तीन-चार परिवारों
के लोग ही मिलकर राज्य की सत्ता पर काबिज होने की साजिश कर रहे हैं। कांग्रेस को
चुनावों में मात देने के लिए भाजपा ने राज्य के लोगों से यह वादा भी किया है कि
सत्ता में आने के १०० दिनों के भीतर वह लोकायुक्त विधेयक लाएगी। इस वादे के जरिए
भाजपा कांग्रेस पर भ्रष्टाचार के लग रहे आरोपों से उपजे जख्म पर नमक छिड़कने का काम
कर रही है। मनोहर पारिकर तो यह दावा भी कर रहे हैं कि जब २००३ में वे मुख्यमंत्री
थे तो उन्होंने लोकायुक्त विधेयक लाया था लेकिन बाद में भाजपा सत्ता से बाहर हो गई
और कांग्रेस ने इस विधेयक को पारित नहीं होने दिया।
भाजपा ने राज्य के लोगों को महंगाई से राहत देने का वादा यह कहते हुए किया है कि
अगर वह सत्ता में आई तो पेट्रोल पर वसूले जा रहे वैट हटा लेगी। अनुमान है कि इससे
पेट्रोल की कीमतों में १० रुपये प्रति लीटर तक की कमी आ जाएगी। भाजपा अपनी
संभावनाओं को मजबूती देने और कांग्रेस को राज्य की सत्ता से बेदखल करनेे के लिए
महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी के साथ तालमेल करने की कोशिश भी कर रही है। हालांकि,
अपनी इन तैयारियों के बावजूद भाजपा ने अपने मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा
नहीं की है। माना जा रहा है कि दावेदारी में पारिकर के अलावा शरद नाइक भी शामिल
हैं।
इस बार का गोवा चुनाव इसलिए भी खास है क्योंकि देश में पहली बार चुनाव में यहां पोल
मॉनिटरिंग सिस्टम का इस्तेमाल होने वाला है। इसके तहत ४० विधानसभा क्षेत्र वाले इस
राज्य के प्रत्येक मतदान केंद्र (१६१२) पर वीडियो कैमरा लगाया जाएगा और इसमें हर
मतदाता की रिकॉर्डिंग होगी। चुनाव आयोग का कहना है कि इससे बोगस वोटिंग नहीं हो
सकेगी और अगर यह प्रयोग सफल रहा तो इसे दूसरे राज्यों में भी लागू किया जा सकता है।
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