
अब टॉप फाइव में सायना
भारतीयखेलों मेंगौरव के क्षण
क्रिकेट को छोड़कर
दूसरे खेलों में कम ही आते हैं।
हाल के बरसों
में बाक्सिंग,
टेनिस,
शतरंज में तस्वीर
बदली है लेकिन
अब बैडमिंटनमें भी हमारे
पास कहने को बहुत कुछ है। और ये मौका
दिया है सायना
नेहवाल ने,
जो अपनी कड़ी
मेहनत क बदौलत
दुनिया की पांच बड़ीखिलाडिय़ों की कतारमें
सामिल होचुकी
हैं। उनमेंटैलेंट
भी हैऔर
जुनून भी
रत्नाश्रीवास्तव.
सायना नेहवाल बैडमिंटन की दुनिया में वहां पहुंच गई हैं, जिसके बारे में कुछ समय पहले तक सोचा नहीं जा सकता था। वह दुनिया की नंबर पांच खिलाड़ी बन गई हैं। जिस दिन वह रैंकिंग में नंबर पांच पर पहुंची, उसी दिन उन्होंने अपना बीसवां जन्मदिन भी मनाया।
हाल के सालों में चीनी महिला बैडमिंटन खिलाडिय़ों की तूती बोलती रही है, सायना के मजबूती से आगे बढ़ते कदमों ने उसे तोड़ा है। एकजमाने में टॉप टेन महिला खिलाडिय़ों में आठ चीनी खिलाड़ी हुआ करती थीं, लेकिन सायना का यहां पहुंचना एक बड़ी उपलब्धि की तरह है। सायना का कहना है कि अगर कोई कुछ करने कीठान लेतो कुछभी असंभव नहीं।आखिर क्या राजहै सायनाके लगातार आगेबढ़ते जाने का।शायद इसका जवाब यही होगाकि सायनाहर सालअपना एकलक्ष्य तय करतीहैं, औरउस परफिर पूरीतरह जुटजाती हैं। उन्होंनेअब तकके अपनेकैरियर में यहीकिया हैऔर उन्हें इसका इनाम भी मिला है। रही बात मेहनत और टैलेंट की तोदोनों में उनकाकोई जवाब नहीं।कहा जासकता हैकि प्रकाश पादुकोणके बादसायना भारत कीसबसे बड़ीबैडमिंटनखिलाड़ी हैं। लोगये कहसकते हैं किसायना को अबजल्दी से जल्दीनंबर वनकी पोजिशन पर पहुंचना चाहिए। लेकिनसायना को इसकीकोई जल्दी नहीं। उनका कहना हैकि वहनंबर वनकी पोजिशन पर तो पहुंचना चाहतीहैं लेकिन फिलहालये उनकाटारगेट नहीं हैबल्कि वो अपनीस्थिति और सुधारना चाहती हैं। मार्चका महिनाउनके लिए खासा यादगार रहा। पहलेवह आल इंग्लैंडबैडमिंटन चैंपियनशिप में सेमीफाइनल में पहुंची और फिर रैंकिंग में नंबरपांच में शुमार कर लीगईं। जहांतक यादआता हैवो यहीहै किपिछले कुछ सालोंमें लोगोंने उन्हेंलगातार आगे हीबढ़ते देखा है।वह देशकी सबसेकामयाब और दृढ़इच्छाशक्तिवाली महिलाखिलाडिय़ोंमें शुमार कियेजाने लगीहैं। उनके अंदरवो सबकुछ हैजो एकचैंपियन खिलाड़ी में होना चाहिए यानिप्रबल इच्छाशक्ति, जबरदस्त अनुशासनऔर कठोर मेहनत। ये हीवो खासियतें हैं, जिनकी बदौलत सायनाचोटी कीखिलाडिय़ोंमें शुमार होचुकी हैं।
सायना ने देश को जो गर्व दिया, वो खेल केक्षेत्रमें कभी कभी ही नसीब हो पाताहै। उनकेकोच औरएक जमाने में देश के चोटी के शटलरगोपी चांद कहतेहैं किसायना की उपलब्धिको मेरेऔर प्रकाश पादुकोणके आलइंग्लैंडखिताब जीतने सेकम नहीं है। उनकी इस सफलता से गोपीचांद के साथ साथ प्रकाश पादुकोण भी खुश हैं। कोचगोपीचांदने सायनाके लिएटाइम फ्रेम केहिसाब से जोलक्ष्य तय कियेथे, वोउससे कहींआगे चलरही हैं। गोपीकहते हैं किऐसा नहीं कि दुनिया मेंसायना के बराबरीकी खिलाड़ी नहीं।लेकिन जबरदस्त मेहनतऔर कभीहार नहींमानने की दृढइच्छाशक्तिने उन्हेंसबसे अलग मुकामपर पहुंचा दिया।उन्हें लगता हैकि सायनाअगले दोसाल मेंदुनिया की नंबरवन खिलाड़ी बननेकी क्षमता रखतीहैं। वहींप्रकाश पादुकोण काकहना हैकि सायनाजिस तरहआगे बढ़रही हैं, उससे लगता हैकि उनकेपर्याप्तस्थायित्वहै औरइसे बनाये रखनाउनके लिए खासाजरूरी है। इससाल वोआल इंग्लैंड बैडमिंटन चैंपियनशिप के सेमी फाइनल में पहुंची तोपिछले इंडोनेशिया सुपर सीरीजको जीतकर बढ़ीकामयाबी हासिल की थी।
20 वर्षीय सायना कोजानने वाले लोगअब उनकेखेल मेंबड़ा बदलाव देख रहे हैं। पहलेवो केवलपावर गेम परविश्वास करती थीं।अपने हरमैच मेंपॉवर गेम काही सहारा लेतीथीं। लेकिन ऐसाकरके वोअपना खेल विरोधीखिलाडिय़ोंके सामने खोलभी देतीथीं। बीजिंग ओलंपिकमें क्वार्टर फाइनलतक केसफर मेंउन्हें अंदाज होगया किउनके खेल कोअब बदलाव कीजरूरत है, लिहाजा उन्होंन डिफेंस को भीडाल की तरह इस्तेमाल करना शुरू किया। अबउनका खेल पावरऔर डिफेंस कामिलाजुलारूप है, ऐसा करने सेअब उनकेविरोधी उनके रुखका अंदाज लगानहीं पाते।
कड़ा
अनुशासन:
सायना
अपने जीवनको कड़ेअनुशासन
में बांधा हुआ है।सुबह छह
बजे
उठती है। 07.30
बजे तकप्रैक्टिसकोर्ट
पर पहुचजाती
है। सुबहजहां
पूरे जोरशोरसे
बैडमिंटन कीप्रैक्टिसकरती है,
वहीं
शाम कासेशन
जिम, रनिंगके नामहोता
है। अगरवो
हैदराबाद मेंअपने घरमें
होती हैंतो शामको एकघंटे
कोच केसाथ
रियाज करअपनी
खेल कोऔर
दमदार करनेकी
कोशिश करतीहैं।
सायना काजन्म
हरियाणा केहिसार
में हुआहै।
पिता हरवीरसिंह औरमां ऊषारानी
खुद हरियाणाकी चोटीकी
खिलाडिय़ों में थे।लिहाजा
सायना कोबैडमिंटनविरासत
में मिला।उन्होंनेआठ सालकी उम्रमें
पहली बाररैकेट
पकड़ा। तबउनके
वैज्ञानिक पिताहैदराबादमें थे,
जहां
बैडमिंटन काएक अलगही
माहौल था।गोपीचांदजैसे
नामवर खिलाड़ीकी
मौजूदगी केकारण येशहर मेंबैडमिंटनका नकेवल एकअलग तरहका
माहौल था,
बल्कि
सुविधाएं भीबेहतर
थीं। जल्दीही
शुरुआती कोचोंने
सायना कीप्रतिभा
को पहचानलिया।
लेकिन अगरसायना
आज इसमुकाम
पर हैतो
इसमें उनकेमाता-पिताके
योगदान कोनकारा
नहीं जासकता,
जिन्होंने बेटीके लिएकाफी
संघर्ष किया।महंगे
रैकेट, जूतों,
ट्रेनिंगऔर
टूर्नामेंटों मेंशिरकत
कराने केलिए
अपना प्रोविडेंटफंड भीनिकाला।
उस दौरानसायना
पर हरमहिने
तकरीबन दससे बारहहजार
रुपये काखर्चा
होता था,
एक
सामान्य पृष्ठभूमिवाले
अभिभावकों केलिए येबिल्कुल
आसान नहींथा
लेकिन तबभी
उन्होंने इसेचुनौती
की तरहकबूल
किया। वर्ष 2002
में
उन्हें योनेक्सके रूपमें
पहला स्पांसरमिला।
फिर 2005 मेंजब
उद्योगपति लक्ष्मी निवासमित्तल
ने देशके
प्रतिभावान खिलाडिय़ों केलिए एकट्रस्ट
बनाया तोसायना
जैसी खिलाडिय़ोंके लिएये
वरदान साबितहुआ।
सायना केदेश-विदेशमें
खेलने काखर्च
काफी हदतक अबये
ट्रस्ट वहनकरता
है।
भारतीय
बैडमिंटन
के पांचबड़े
लम्हे
*
प्रकाशपादुकोण
का 1970
में आलइंग्लैंडचैंपियनशिपजीतना- पहलीबार जबप्रकाश
ने इंग्लैंडमें येप्रतियोगिताजीती,
तो देशके लिएये गौरवका क्षणथा। आलइंग्लैंडचैंपियनशिपको गैरआधिकारिकवल्र्ड
चैंपियनशिप कादर्जा
हासिल है।तब
प्रकाश नेये
साबित कियाकि अगरभारतीय
खिलाड़ी चाहेंतो वोइस खेलकी चोटीपर
पहुंच सकतेहैं।
* वर्ष 2001 में पुलेलागोपीचांदका आलइंग्लैंडचैंपियन बनना-प्रकाशपादुकोण की जीतके बादआल इंग्लैंड खिताबभारतीय खिलाडिय़ों केलिए फिरएक सपनाबनकर रहगया था।जिसे इक्कीस सालबाद साकार कियागोपीचांदने। तबतक खेलबदल चुका थाऔर बैडमिंटन मेंपॉवर खेल केसाथ-साथचाइनीज खिलाडिय़ों कीतूती बोलने लगीथी।
* नंदूनाटेकर, सेलंगोर इंटरनेशनल, 19५6-नाटेकरपहले भारतीय थे, जिन्होंनेविदेश मेंपहचान बनाई। उनकेपास स्ट्रोकों कीभरमार थी औरखेल मेंअलग हीबात, जोउनको ऊंचाई तकले गई।
* सायनानेहवाल, इंडोनेशिया सुपरसीरीज, 2009-सायनाकी जीतने उपेक्षित रहने वालेभारतीय महिला बैडमिंटनको एकनई दिशाऔर आत्मविश्वास दियाहै। उम्मीद हैकि अबउनकी येउपलब्धि नई लड़कियोंके लिएउत्साह का कामकरेगी
* दिनेशखन्ना, एशियन बैडमिंटनचैंपियनशिप, 196५-साठके दशकमें दिनेश खन्नाबैडमिंटनजगत में ..दवाल.. के नामसे मशहूर थे।उनके पास हरतरह केस्ट्रोक्सकी तोड़रिवर्स शाट्स केरूप मेंमौजूद थी। उनकेबाद अबतक कोईभी भारतीय एशियाईखिताब नहीं जीतसका है।












